घोसीपुर में ग्राम सभा की जमीन को वक्फ बोर्ड के नाम करने के मामले में डीएम बी. चंद्रकला ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में उन्होंने दो पूर्व एसडीएम, एक पूर्व तहसीलदार, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सहित सात के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए हैं। जिस पर शनिवार को तहसीलदार भगत सिंह ने देहलीगेट थाना में एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें अहम बात ये है कि जिन लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करायी है। उनमें से तीन की मृत्यु हो चुकी है।
ये है मामला
ग्राम घोसीपुर में ग्राम सभा की जमीन थी। इस जमीन पर 31 मई 1983 को तत्कालीन एसडीएम ओपी दूबे के आदेश पर पीर मेला दर्ज करने का आदेश पारित किया गया। लेकिन इसकी प्रविष्टि 7 जुलाई 1980 की दर्ज की गई। इसके बाद पुन: उपजिलाधिकारी द्वारा 1984 में दूसरे खसरा नंबर पर भी पीर मेला दर्ज कर दिया गया। जबकि यह भूमि जलमग्न थी।
20 जुलाई को वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज किया
1983 में जहां खसरा नंबर 626 की जमीन पर पीर मेला दर्ज किया गया। तो 1984 में खसरा नंबर 624/2 और 624 पर पीर मेला दर्ज कर दिया गया। इसके बाद 2008 में तत्कालीन उपजिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने अपने न्यायालय में योजित वाद में इन दोनों खसरा नंबराें में पीर मेला दर्ज होने का आधार सही मानते हुए आदेश पारित कर दिए। इसके बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और सहायक सर्वे आयुक्त वक्फ एसएन पांडे के पत्र के आधार पर तत्कालीन तहसीलदार रमेश चंद यादव ने 20 जुलाई 2016 को तहसील अभिलेखों में इसे वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज कर दिया।
ऐसे खुला खेल
मुख्यमंत्री की घोषणा के आधार पर जब बिजलीघर बनाने के लिए जमीन की तलाश शुरू हुई तो यह जमीन अलॉट कर दी गई। जिस पर विद्युत विभाग ने काम शुरू कर दिया। इस पर पीर हाजा के मुतवल्ली अनवारूद्दीन ने ऐतराज जताते हुए प्रार्थना पत्र दिया। जब विवाद खड़ा हुआ तो पूरे मामले की जांच कराई गई। जिसमें पूरा खेल सामने आ गया।
इनके खिलाफ हुई एफआईआर
एसडीएम हर्षिता माथुर की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम बी. चंद्रकला ने पूरे मामले में स्वयं निरीक्षण किया। इसके बाद पूर्व एसडीएम ओपी दूबे तथा चंद्र प्रकाश सिंह, पूर्व तहसीलदार रमेश चंद यादव, पूर्व तहसीलदार रामनाथ जाटव, कानूनगो नेतराम, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी एसएन पांडे तथा राजस्व निरीक्षक शाने हैदर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। तहसीलदार भगत सिंह की तहरीर पर थाना देहलीगेट में धारा 420, 464, 467, 167, 217, 218, 219 और 120बी के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है।
तीन आरोपियों की हो चुकी है मौत
तहसीलदार भगत सिंह ने जिन सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, उनमें तीन की मौत हो चुकी है। इनमें पूर्व एसडीएम ओपी दूबे, पूर्व तहसीलदार रामनाथ जाटव और पूर्व कानूनगो नेतराम शामिल हैं।
वक्फ बोर्ड का आदेश आगे बढ़ाने पर फंसे पांडे
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और सहायक सर्वे कमिश्नर वक्फ एसएन पांडे सिर्फ एक पत्र आगे बढ़ाने पर इस मामले में आरोपी बन गए हैं। उक्त विवादित वक्फ संपत्ति के मुतवल्ली अनवारूद्दीन ने बिजलीघर लगाए जाने के विरोध में वक्फ बोर्ड लखनऊ में शिकायत की थी। जिसमें कहा गया था कि उक्त जमीन कागजों में वक्फ की संपत्ति दर्ज है। इस पर वक्फ बोर्ड ने 18 मई 2016 को जिलाधिकारी को पत्र लिखा। जिसमें उक्त जमीन को वक्फ पीर मेला हजरत शहाबुद्दीन खेडे़ वाले पीर का नाम दर्ज कराने तथा उक्त जमीन में बिजलीघर न बनाने की बात कही गई थी। इसी पत्र के आधार पर उन्होंने तहसीलदार सदर से उक्त संपत्ति वक्फ के नाम दर्ज कराने का अनुरोध किया था और यही पत्र उनको फंसा गया।