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‘तप करने से होती है आत्मा की शुद्धि’

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‘तप करने से होती है आत्मा की शुद्धि’
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हस्तिनापुर। कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख शांति समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 29वें दिन मंगलवार को विधानाचार्य सुदीप शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
गुरुवर 108 भावभूषण मुनिराज ने कहा कि तप करने से आत्मा की शुद्धि होती है। कभी-कभी लोग पूछते हैं कि तप जब मन से हो सकता है तो शरीर को इतना कष्ट क्यों देते हैं, मुनि उनसे केवल इतना ही कहते हैं कि अगर दूध को गर्म करना हो तो पहले उसके पात्र को गरम करते हैं, जिस प्रकार पात्र के तपे बिना दूध गरम नहीं हो सकता है, उसी प्रकार शरीर के तपे बिना मन व आत्मा का जागरण नहीं हो सकता।
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विधान का विसर्जन रेखा जैन राकेश जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन संगीता जैन, राकेश जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन रंजीता जैन, सिद्धि जैन तथा चौबीसों भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन किरण मेहता, जयंतीलाल मेहता ने किया।
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इससे पूर्व स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य प्रिंस जैन, विवेक जैन व शांतिधारा करने का सौभाग्य संयम, नरेंद्र अमित, विशाल जैन को प्राप्त हुआ। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले दीप प्रज्ज्वलन सुनीता जैन, कामना जैन, सोनल जैन अलवर ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया। आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों को 48 अर्घ्य चढ़ाए। इसके बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। 108 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
इस मौके पर अध्यक्ष विनोद जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र जैन, सह संयोजक मोतीलाल जैन, शशांक जैन का सहयोग रहा।
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