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#Pulwama: शहीद अमित के परिवार ने पेश की प्यार और त्याग की अनूठी मिसाल

Fri, 01 Mar 2019 07:57 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
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शहीद अमित की तस्वीर के आगे बैठे रहे पिता सोहनपाल - फोटो : अमर उजाला
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सरकारी नौकरी एक है, लेकिन पाने वाले चार भाई। जिनमें दो का दावा बेहद मजबूत, लेकिन परिवार के आपसी प्यार और त्याग की भावना तो देखिए, चारों भाई नौकरी के लिए एक दूसरे का नाम आगे करते रहे। छोटा भाई बड़े को, तो बड़ा छोटे का नाम लेता रहा। बाद में बड़े बुजुर्गों की सलाह के बाद एक भाई का नाम तय हुआ। पुलवामा में शहीद अमित के परिवार ने आपसी त्याग और प्यार की अनूठी मिसाल पेश की है।

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प्रदेश सरकार ने पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। जिले के दो जवान शहीद हुए। इन्हें पुलिस विभाग में नौकरी दी जानी है। पुलिस प्रशासन ने इसके लिए शहीद परिवारों को फार्म भी उपलब्ध कराए हैं। शहर की रेलपार कॉलोनी निवासी शहीद अमित के परिवार में जब नौकरी की बात उठी तो सारे भाई एक दूसरे का ही नाम आगे करते रहे। शहीद अमित के पिता सोहनपाल के अनुसार घर में अमित के चार भाई और पांच बहने हैं। बहन की शादी हो चुकी है। चार भाइयों में प्रमोद सबसे बड़ा है। जो बिजली की दुकान करता है। दूसरे नंबर का अर्जुन फोटोग्राफी करता है। दोनों की शादी हो चुकी है।

तीसरे नंबर का भाई सुनील है जो एमकॉम है और प्राइवेट एकाउंट का काम करता है। जबकि उससे छोटा अनिल भी एमकॉम पास है और एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। घर में जब एक सदस्य की नौकरी पर बात हुई तो सभी भाई एक दूसरे का नाम आगे करते रहे। प्रमोद ने कहा कि उसकी तो दुकान है, भले ही काम कम हो। अर्जुन ने भी कहा कि वो तो हाईस्कूल है। सुनील और अनिल दोनों एमकॉम तक पढ़े हैं। नौकरी मिलने के बाद उनके जल्दी प्रमोशन के भी चांस होंगे। अर्जुन ने इन दोनों के नाम आगे कर दिए। कहा कि ये दोनों भाई अविवाहित भी हैं। बात अनिल पर आई तो उसने सुनील का नाम आगे कर दिया। तर्क दिया कि वो तो बच्चों को पढ़ाकर थोड़ा बहुत कमा रहा है। बाद में परिवार ने काफी बातचीत के बाद सुनील का नाम तय किया।

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अपने संस्कार पर पूरा भरोसा था : पिता
शहीद के पिता सोहनपाल के अनुसार चारों भाइयों का ये प्यार और त्याग देख उन्हें सुकून है कि उनके संस्कार बच्चों में हैं। बेटों की एक दूसरे के प्रति त्याग की भावना के कारण उन्हें भी नौकरी के लिए एक सदस्य का नाम तय करने में काफी समय लगा। बाद में चारों भाईयों ने मिलकर सुनील का नाम तय किया और फार्म भरकर एसडीएम के यहां भेज दिया गया। 

शहीद बेटे की तस्वीर के आगे गुमसुम बैठ पिता ने बताई मन की बात
गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे अमर उजाला टीम जब अमित के घर पहुंची तो उसके पिता अपने शहीद बेटे अमित की फोटो के आगे बैठे थे। बार बार उसकी फोटो निहार रहे थे। आंखें नम थीं और दिल में बेटे की यादें। हमने अमित की बात छेड़ी तो भावुक हो गए। बोले अमित घर के मुखिया वे जरूर हैं, लेकिन अमित ने मुखिया से भी बड़ी जिम्मेदारी अपने सिर ले रखी थी। उसकी नौकरी के बाद उसके दो बड़े और दो छोटे भाई सब खाली थे। दो भाई अर्जुन फोटोग्राफी कर कुछ कर लेता था। सुनील प्राइवेट नौकरी करता था जबकि अनिल प्राइवेट टीचर। बड़े भाई प्रमोद का कोई खास काम नहीं था। उसने अपने वेतन से बड़े भाई को गुुरुद्वारे पर बिजली की दुकान कराई। जब भी आता घर में सबके लिए कुछ ना कुछ लाता था। वो हर किसी का चहेता था। मोहल्ले वाले भी उसके आते ही मिलने आ जाते थे।

समाधि स्थल पर भंडारा करेंगे
शहीद के पिता ने बताया कि अमित हनुमान और साईंभक्त था। फरवरी में जब वो छुट्टी पर चल रहा था तो सात फरवरी को ही उसने साईं मंदिर में भंडारा किया था। इसके बाद वो छुट्टी पूरी कर गया और 14 फरवरी को वो शहीद हो गया। वे चाहते हैं कि उसकी समाधि स्थल पर वे भी बड़ा भंडारा करें।

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