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शादी है आऊंगा महीने भर की छुट्टी लेकर..., वो लौटा मगर तिरंगे में लिपटकर, शहीद अमित की भावुक कहानी

Sat, 16 Feb 2019 03:06 PM IST
Dimple Sirohi रोहित अग्रवाल, अमर उजाला, शामली
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पुलवामा हमले में शामली के रेल पार निवासी सीआरपीएफ के जवान अमित कुमार अपने वतन के लिए शहीद हो गए। शनिवार को उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। जवान की अंतिम यात्रा में जहां सैंकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए वहीं हर कोई अमित के साथ गुजारे पल यादकर भावुक हो उठा। अमित ने ड्यूटी पर जाते हुए अपनी मां से बहुत सारी छुट्टियां लेकर जल्दी लौटकर आने को कहा था। वह लौटा तो जरूर लेकिन तिरंगे में लिपटकर। शहर के बेटे की शहादत पर हर किसी को गर्व है लेकिन परिजनों को बेटे से कभी न मिल पाने का दुख इतना है कि आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। 

 
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परिजनों के अनुसार अमित को बचपन से ही फौज में जाने की इच्छा रखता था। जहां भी फौजी को देखा उससे हाथ मिलाना और बात करना उसे अच्छा लगता था। 

 
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शहर के कालेज से बीएससी कर रहा था कि उसने सीआपीएफ में भर्ती का आवेदन किया। 2017 में उसकी भर्ती सीआरपीएफ में हो गई। दिसंबर 2017 में रामपुर में उसकी ट्रेनिंग हुई। इसी दौरान उसके बड़े भाई अर्जुन का रिश्ता तय हो गया। 

 

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 फरवरी 2018 में शादी थी, लेकिन अमित को ट्रेनिंग के कारण छुट्टी नहीं मिली। पिता ने छुट्टी के लिए सीआरपीएफ के अफसरों से बात करनी चाहिए लेकिन खुद अमित ने ही मना कर दिया। 

 
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पिता के अनुसार अमित ने कहा कि पिताजी ये ट्रेनिंग ही उसके जीवन भर काम आएगी। दो भाई ओर हैं उनकी शादी में आ जाऊंगा। अमित की अपने काम के प्रति निष्ठा देख पिता ने भी छुट्टी के प्रयास नहीं किए। अमित के बिना ही अर्जुन की शादी हुई।  

 
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  पिता सोहनपाल के अनुसार अमित 24 जनवरी को ही 20 दिन की छुट्टी लेकर आया था। मिलनसार होने के कारण वो आस पड़ोस के अपने दोस्तों के यहां भी गया। रिश्तेदारी में भी घूमकर आया। 

 
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छुट्टी खत्म होने के बाद 12 फरवरी को जब वो वापस जाने लगा तो उसकी मां की आंखें भर आईं। उसके दो छोटे भतीजे भी लिपट गए। माहौल बहुत भावुक हो गया था, ये देख अमित ने ही परिजनों को संभाला। उसने माहौल हल्का करते हुए अपनी मां से कहा अरी मां क्यों चिंता करती है। जल्दी से भाई का रिश्ता ले ले फिर शादी में एक महीने की छुट्टी लेकर आऊंगा।  

 
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गौरतलब है कि रेलपार निवासी शहीद अमित के पिता सोहनपाल आर्थिक तंगी में अपना जीवनयापन करते थे। छह भाई बहनों में सबसे छोटे अमित शुरू से ही मेहनती थे। वह बचपन से ही सेना में भर्ती होना चाहते थे। उनका एक भाई फोटोग्राफर तो एक की इलेक्ट्रिशियन की दुकान है। अमित ने सेना में भर्ती होने से पहले छात्रों को ट्यूशन भी पढ़ाते थे। 
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