सरकारी अस्पतालों में फिर खुलेंगे जनऔषधि केंद्र
मेरठ। सरकारी अस्पतालों में बंद पड़े जनऔषधि केंद्र फिर से खोलने की कवायद शुरू कर दी गई है। इनके जनवरी माह में खुलने की उम्मीद है। इस बार केंद्र सरकार खुद इन्हें संचालित कर सकती है।
सस्ती दवाओं की जरूरत को पूरा कर रहे मेडिकल और जिला अस्पताल के प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र करीब दो माह पूर्व लाइसेंस का नवीनीकरण न होने से बंद कर दिए गए थे। मेडिकल स्टोरों के मुकाबले इन जनऔषधि केंद्रों पर दवाएं 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती थीं। मेरठ समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सभी सरकारी अस्पतालों में इन जनऔषधि केंद्रों को एक निजी संस्था संचालित कर रही थी। अब सरकार खुद इन्हें संचालित करने की तैयारी कर रही है।
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250-300 तरह की मिलती थीं दवाइयां
मेडिकल कॉलेज में 24 दिसंबर, 2018 को खुले केंद्र में कोरोना काल से पहले यहां से हर माह करीब 35 हजार लोग दवाइयां लेते थे। कोरोना काल में भी यह संख्या लगभग साढ़े सात हजार थी। वहीं, जिला अस्पताल का जन औषधि केंद्र 15 जुलाई 2018 से चल रहा था। कोरोना काल से पहले हर माह 25 से 30 हजार लोग दवाइयां लेते थे, जो कोरोना काल में हर माह करीब छह हजार थी। इन प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों पर 600 तरह की दवाइयां देने वादा किया गया था। हालांकि इनमें से 250-300 तरह की दवाइयां यहां सस्ते दामों पर मिल जाती थीं।
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ये है सस्ती होने की वजह
इन केंद्रों पर दवाओं के सस्ते होने की वजह यह है कि दवा का जेनेरिक नाम पूरे विश्व में एक ही होता है। बीमारी के लिए डॉक्टर जो दवा लिखते हैं, उसी दवा के सॉल्ट वाली जेनेरिक दवाएं जन औषधि केंद्र पर मिल सकती हैं, बशर्ते वे उपलब्ध हों। ये जेनेरिक दवाएं उत्पादक से सीधे रिटेलर तक पहुंचती हैं। कीमत का यह अंतर पांच से दस गुना तक हो सकता है। जेनेरिक दवाओं के मूल्य निर्धारण पर सरकार का अंकुश होता है, इसलिए वे सस्ती होती हैं जबकि पेटेंट दवाओं की कीमत कंपनियां खुद तय करती हैं।
--कोट---
अगले माह खुल जाएंगे
लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं होने के कारण औषधि केंद्रों को बंद किया गया है। अब फिर से इन्हें खोले जाने की तैयारी है।
- गौतम कपूर, नोडल अधिकारी, जन औषधि केंद्र