सांसद राजेंद्र अग्रवाल को सीएम सिक्योरिटी में तैनात जवानों ने इमरजेंसी में जाने से रोक दिया। इस दौरान उनके साथ धक्कामुक्की भी हुई। इस पर सांसद भड़क गए और उनके समर्थकों ने इमरजेंसी के बाहर हंगामा कर दिया। कुछ देर बाद वे शांत हुए। इस पर सांसद का कहना था कि इस तरह के निरीक्षण के दौरान ऐसा हो जाता है। लेकिन फिर भी प्रशासन को जनप्रतिनिधियों की पहचान होनी चाहिए। प्रशासन की व्यवस्था में कमी रही है।
इसके अलावा इमरजेंसी में भी कई बार धक्कामुक्की हुई। एक भाजपा कार्यकर्ता को ट्रॉमा सेंटर में जाने से रोक दिया गया। उसने जबरन अंदर जाने की कोशिश की तो पुलिसकर्मी ने उसका गिरेबान पकड़ लिया और बाहर निकाल दिया। इस पर वह भड़क गया। इस दौरान उसकी पुलिसकर्मियों से कहासुनी भी हुई। यही नहीं, मुख्यमंत्री के आने से पहले एक बार मीडियाकर्मियों को भी इमरजेंसी से बाहर निकाल दिया गया। हालांकि जब मुख्यमंत्री इमरजेंसी के निरीक्षण को आए तो मीडियाकर्मी भी वहां पहुंच गए। वहीं, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना था कि ज्यादातर लोगों में मुख्यमंत्री के साथ-साथ रहने की होड़ मची हुई थी, इस कारण यह दिक्कत आई।
जब कमिश्नर भी रोके ट्रॉमा सेंटर के बाहर
मेरठ। इमरजेंसी में अफरातफरी का आलम यह था कि कमिश्नर को ट्रॉमा सेंटर के बाहर ही रोक दिया, उन्हें इमरजेंसी में नहीं जाने दिया गया। बाद में कमिश्नर को एक पुलिसकर्मी ने देखा और कहा कि सर आप जाइए। इनके अलावा ट्रॉमा में जा रहे एक विधायक को भी पुलिसकर्मी ने रोकने की कोशिश की तो वह यह कहते हुए ट्रॉमा में चले गए कि मैं विधायक हूं।
इमरजेंसी के बाहर योगी-योगी
मेरठ। जब सीएम योगी इमरजेंसी का निरीक्षण कर चले गए, इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने योगी-योगी के नारे लगाए। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज के कुछ स्टाफ ने प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता जिंदाबाद के भी नारे लगाए।