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नोटिस को लेकर आयकर ऑफिस में बखेड़ा

Tue, 28 Mar 2017 02:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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आयकर विभाग द्वारा एक अधिवक्ता को कंस्ट्रक्शन कंपनी के नाम का नोटिस भेज दिया गया। अधिवक्ता अपने साथियों के साथ इसका जवाब देने आयकर विभाग के ऑफिस पहुंचा तो बखेड़ा हो गया। दोनों पक्षों में तीखी बहस के बाद हाथापाई हो गयी।
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वरिष्ठ अधिवक्ता रामकुमार शर्मा ने बताया कि उनकी पत्नी का छीपी टैंक पर निंबस बुक स्टोर है। उसी परिसर में एक कंस्ट्रक्शन कंपनी का आफिस भी बताया जाता है। 24 मार्च को आयकर विभाग की टीम इस भवन में मौजूद कंस्ट्रक्शन कंपनी के आफिस की जानकारी होने पर सर्वे के लिए पहुंची थी। रामकुमार शर्मा ने आरोप लगाते हुए बताया कि जिस समय आयकर टीम पहुंची थी तो वे पत्नी के साथ बुक स्टोर पर थे। स्टोर में पहुंचे एक कर्मचारी ने कहा कि साहब बाहर बुला रहे हैं। बाहर मिले आयकर विभाग के उपायुक्त एसएन ताखर ने कहा कि वह लिखकर दें कि यहां कोई नहीं मिला।
उन्होंने इससे मना किया तो उपायुक्त ने स्टोर में पहुंचकर एक नोटिस तैयार कर उसे रिसीव करने को कहा। जिससे इंकार करने पर वह उसे बुक स्टोर के बाहर चस्पा करके चले गए थे। उन्होंने दावा किया कि नोटिस उनके नाम से था और उस पर उक्त कंस्ट्रक्शन कंपनी का नाम लिखा था। जिसमें कहा गया था कि 27 मार्च को व्यक्तिगत रूप से उपायुक्त के कार्यालय में उपस्थित होकर जवाब दें, नहीं तो दस हजार रुपये जुर्माना देना होगा।
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इस नोटिस का जवाब लेकर रामकुमार शर्मा सोमवार को करीब दो दर्जन अधिवक्ताओं के साथ आयकर विभाग कार्यालय पहुंचे। अधिवक्ताओं ने एतराज जताते हुए आरोप लगाया कि जब उनका उक्त कंस्ट्रक्शन कंपनी से कोई संबंध नहीं है तो आयकर विभाग ने जानबूझकर रामकुमार शर्मा का मानसिक उत्पीड़न क्यों किया। इस पर दोनों पक्षों में बहस हो गयी। रामकुमार शर्मा ने आरोप लगाया कि उन्हें और अधिवक्ताओं को बाहरी लोग बुलाकर बंधक बनाकर अभद्रता की गई।

कानूनी कार्रवाई करूंगा
मेरा किसी भी कंस्ट्रक्शन कंपनी से कोई संबंध नहीं है, फिर भी मुझे आयकर विभाग ने बेवजह न सिर्फ नोटिस जारी किया, बल्कि मेरा मानसिक उत्पीड़न भी किया। जब मैं इसका जवाब देने गया तो बंधक बनाकर अभद्रता की गयी। मैं इस मामले में कानूनी कार्रवाई करूंगा। -रामकुमार शर्मा, अधिवक्ता

सारे आरोप निराधार
अधिवक्ता को नोटिस जारी किया गया था यह सही है। लेकिन उन्हें शालीनता के साथ इसका जवाब देने आना चाहिए था। उनका तरीका सही नहीं था। बंधक बनाने और मारपीट का आरोप पूरी तरह निराधार और झूठा है। विभागीय प्रक्रिया के तहत ही नोटिस की कार्रवाई की गयी है। आरोपों के साक्ष्य में कार्यालय में लगे कैमरों में हुई वीडियोग्राफी मौजूद है। -अनुराग दूबे, उपायुक्त आयकर विभाग
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