मेरठ। प्रदेश स्तरीय आह्वान पर मेरठ के ग्राम पंचायत सचिवों और ग्राम विकास अधिकारियों ने शुक्रवार को ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू करने के विरोध में सांकेतिक शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को ज्ञापन सौंपकर मांगों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। चेतावनी भी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गई तो संगठन आंदोलन करेगा।
संगठन के जिलाध्यक्ष ग्राम पंचायत अधिकारी नकुल धामा ने बताया कि शासन द्वारा तीन नवंबर को जारी निर्देश के अनुसार प्रदेशभर में ग्राम पंचायत अधिकारियों और ग्राम विकास अधिकारियों की ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य की गई है। यह व्यवहारिक रूप से अत्यंत कठिन है। इस संबंध में संगठन ने पहले कई बार उच्चाधिकारियों से पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। प्रांतीय कार्यकारिणी ने निदेशक पंचायती राज को 11 और 29 नवंबर को पत्र लिखकर ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को स्थगित करने की मांग की थी।
इसके अतिरिक्त ग्राम विकास अधिकारी संघ और राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने भी शासन को समस्याओं से अवगत कराया है और समाधान के लिए तीन स्तरीय बैठक की मांग की है। संगठन के पदाधिकारी नरेंद्र प्रधान ने बताया कि उनके आंदोलन के तहत एक दिसंबर से चार दिसंबर तक अधिकारियों ने काली पट्टी बांधकर कार्य किया। अब शुक्रवार सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक विकासखंड स्तर पर शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया गया। मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव को संबोधित ज्ञापन खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को सौंपा गया।
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि 10 दिसंबर से फिक्स्ड टीए (यात्रा भत्ता) बढ़ाने और साइकिल भत्ता के स्थान पर मोटरसाइकिल भत्ता लागू कराने की मांग उठाई जाएगी। इसके बाद 15 दिसंबर को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के जटिल गेटवे के स्थान पर इंटीग्रेटेड मोबाइल एप/पोर्टल को विकसित कराने की मांग की जाएगी। इसी क्रम में सभी अधिकारी अपने-अपने डोंगल संबंधित विकासखंड कार्यालय में जमा करेंगे।