प्रस्तावित जीएसटी की खामियों एवं टैक्स की अधिक दरों को लेकर बुनकर एसोसिएशन और खंदक बाजार एसोसिएशन ने बाजार बंद कर कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में व्यापारियों ने कपड़ा व्यापार को जीएसटी से मुक्त करने की मांग उठाई।
बुनकर एसोसिएशन और हैंडलूम वस्त्र व्यापारी संघ खंदक बाजार के व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखा। इस दौरान दोनों संगठन अलग-अलग जुलूस लेकर कलक्ट्रेट पहुंचे और कपड़ा व्यापार पर 5 प्रतिशत जीएसटी का विरोध किया। बुनकरों और व्यापारियों ने कहा कि कपड़ा आवश्यक सेवा में आता है, इसे जीएसटी से मुक्त किया जाए। हैंडलूम वस्त्र व्यापार संघ के प्रधान नवीन अरोड़ा और महामंत्री अंकुर गोयल ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार हैंडलूम कपड़े पर कर लगाया गया है। कृषि क्षेत्र के बाद यह उद्योग गरीब मजदूरों एवं व्यवसायियों को रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी लघु एवं कुटीर उद्योग के पक्षधर थे, उनका कहना था कि खादी वस्त्र नहीं विचार है इसका हमे सम्मान करना चाहिए।
बुनकर एसोसिएशन की ओर से हाजी रहीसुद्दीन और हाजी अतीक ने कहा कि बुनकर समाज के लोग अपने-अपने घरों पर कपड़े की बुनाई का कार्य करते हैं। कम बचत और ज्यादा मेहनत की वजह से उनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं है। जीएसटी से कम पढ़े लिखे बुनकरों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ेगा। हाजी साबिर ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर बुनकरों को जीएसटी से छूट मिलनी चाहिए। इस दौरान पीएम के नाम ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया। हाजी इस्लामुद्दीन, मो. हारून अंसारी, अब्दुल खालिद, हाजी हारुन, रफीक अहमद आदि मौजूद रहे।
वहीं दूसरी तरफ अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल का एक प्रतिनिधि मंडल डीएम से उनके कार्यालय पर मिला। प्रदेश सचिव पंडित विष्णु दत्त स्वामी ने कहा कि जीएसटी में ई-बिलिंग के अलावा मैनुअल बिलिंग की सुविधा पहले जैसी रखी जाए। व्यापारी के लिये कंप्यूटर व चाटर्ड अकाउंटेंट रखना संभव नहीं है। इसलिये उसको वैकल्पिक रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की है कि दो वर्ष तक अर्थदंड नहीं लगना चाहिए। इस दौरान प्रहलाद त्यागी, मनीष शर्मा, इमरान तोमर, मौ नदीम, मो, राणा आदि मौजूद रहे।