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भूगर्भ जल दोहन के विरोध में चार मार्च को कमिश्नरी में धरना

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मेरठ। केन्द्र सरकार की ओर से चलाए गए जल शक्ति अभियान का जल निगम पर कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। न तो तालाब बचाने पर ध्यान दिया जा रहा है और न ही भूगर्भ जल दोहन रोका जा रहा है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर भी काम नहीं किया जा रहा है। जल निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली से नाराज मेरठ सिटीजन फोरम के सचिव गौरांग सिंहल ने आगामी चार मार्च को चौ. चरण सिंह पार्क में धरना देने की चेतावनी दी है।
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उन्होंने कहा कि मेरठ जनपद के सभी ब्लॉक डार्क जोन में पहुंच गए हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि मेरठ में जलशक्ति अभियान पर काम नहीं हो रहा है। अभियान के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों में पृथक मंत्रालय का गठन भी किया है। भूगर्भ जल स्तर सुधार के लिए जिला स्तर पर नोडल अधिकारी भी नियुक्त है। मेरठ नगर की जनसंख्या 18 लाख से ज्यादा है। यहां पेयजल आपूर्ति के लिए करीब 97 ट्यबूवेल उपयोग में हैं। 341 करोड़ की धनराशि से गंगाजल योजना संचालित है। इसके तहत शहर को 100 एमएलडी गंगाजल भोले की झाल से मिलना है। फिलहाल 40 एमएलडी गंगाजल ही शहर में आ रहा है। गंगाजल से पूरे शहर की प्यास बुझाई जा सकती है। इसके बाद भी शहर में ट्यूबवेल चलाए जा रहे हैं और भूगर्भ जल का दोहन हो रहा है।
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