- औद्योगिक गलियारे के विरोध में फिर तेज होगी आरपार की लड़ाई
- किसानों में बढ़ा आक्रोश, बोले- अब केवल भरोसे से नहीं चलेगा काम
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा (मेरठ)। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे किसानों और प्रशासन के बीच 20 दिन पहले हुई वार्ता का अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। 11 जून को एडीएम प्रशासन स्वयं धरनास्थल पर पहुंचे थे और किसानों की सभी मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन करीब 20 दिन बाद भी प्रशासन की ओर से किसी भी मांग पर कार्रवाई नहीं होने से किसानों में भारी नाराजगी है।
धरनारत किसानों का कहना है कि प्रशासन ने उस दिन उनकी मांगों को उचित बताते हुए अधिकारियों की समिति बनाकर शीघ्र निर्णय लेने की बात कही थी। किसानों ने भी प्रशासन के अनुरोध पर संयम बरतते हुए आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखा, लेकिन अब तक न तो कोई लिखित आदेश जारी हुआ और न ही किसी मांग पर अमल शुरू हुआ। इससे किसानों का भरोसा प्रशासन पर कमजोर पड़ने लगा है।
किसानों की प्रमुख मांग है कि औद्योगिक गलियारे के लिए अधिग्रहित की जाने वाली भूमि का मुआवजा वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर तय किया जाए और बाजार मूल्य का चार गुना भुगतान किया जाए। साथ ही प्रत्येक प्रभावित किसान परिवार के एक सदस्य को औद्योगिक क्षेत्र में स्थायी रोजगार की लिखित गारंटी दी जाए।
धरना स्थल पर किसानों ने प्रशासन से शीघ्र वार्ता कर स्पष्ट निर्णय लेने की मांग की है। किसानों का कहना है कि अब उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं, बल्कि लिखित आदेश और जमीनी स्तर पर कार्रवाई चाहिए। यदि आने वाले दिनों में प्रशासन ने मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज करते हुए बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा।