जिला अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन की कमी अभी भी जारी है। हालात यह हैं कि अब आधार कार्ड साथ लाने पर ही एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया जा रहा है। अगर आधार कार्ड नहीं तो इंजेक्शन नहीं। साथ ही मोबाइल नंबर बताना भी अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि इसमें इतनी छूट है कि मोबाइल नंबर अपने परिवार केकिसी सदस्य या पड़ोसी का भी बता सकते हैं।
जिला अस्पताल में हर रोज करीब 150 मरीज आते हैं, इनमें से 60 से 70 मरीजों को ही एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं। बाकी को काउंसिलिंग कर इंजेक्शन लगाने से मना कर दिया जाता है, जबकि अब आधार कार्ड और मोबाइल नंबर न बताने वालों को भी इंजेक्शन नहीं लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा कुछ का अगर आधार कार्ड देहात का है तो उन्हें संबंधित सीएचसी या पीएचसी पर जाने की सलाह देकर चलता कर दिया जाता है। इस संबंध में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. पीकेबंसल का कहना है कि एंटी रेबीज वैक्सीन की कमी है, लेकिन कोशिश रहती है कि अधिकांश लोगों को इंजेक्शन लगा दिए जाएं। उधर, सीएमओ वीपी सिंह का कहना है कि वैक्सीन की कमी की वजह यह है कि इसे सप्लाई करने का जिम्मा सरकार ने एक ही कंपनी को दिया है। कई बार वह जरूरत को पूरा नहीं कर पाती है, जिस कारण वैक्सीन की कमी हो जाती है।
कुत्ता जिंदा है तो इंजेक्शन की जरूरत नहीं
जिला अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने आए लोगों से पहले पूछा जाता है कि जिस कुत्ते ने उन्हें काटा है, वह जिंदा है या नहीं। अगर यह कहा जाता है कि कुत्ता जिंदा है तो उसे इंजेक्शन नहीं लगाया जाता। इसे लेकर कई बार एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) रूम में मरीजों और डॉक्टरों के बीच कहासुनी भी होती है।
कुत्तों के निशाने पर बच्चे
अस्पतालों की ओपीडी में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने वालों की भरमार है। जिला अस्पताल, 31 पीएचसी और 12 सीएचसी पर हर रोज 100 से ज्यादा कुत्ते द्वारा काटने से घायल बच्चे आ रहेहैं। उनके परिजनों का कहना है कि गली के आवारा कुत्तों ने बच्चों का घर से निकलना तक दूभर किया हुआ है।