नगर निकाय चुनाव की तैयारी पुख्ता होने का दावा कर रहे नगर निगम और जिला निर्वाचन कार्यालय की पोल मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य से खुल गई है। एक तरफ जहां नये परिसीमन के बाद बूथ निर्धारण को लेकर तमाम आपत्तियां आ रही हैं, तो नगर निगम की मतदाता सूची से भारी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची में नहीं मिल रहे हैं। इसी मामले पर सोमवार को तहसील में नगर निगम और निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों कर्मचारियों की बैठक हुई। जिसमें इन गड़बड़ियों से निपटने पर विस्तार से मशक्कत हुई।
राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूची के अंतिम पुनरीक्षण कार्य की अंतिम तिथि 15 मई तय की थी। लेकिन अंतिम तिथि तक मेरठ में पूरी तरह अव्यवस्था कायम रही। स्थिति ये है कि तमाम चर्चित नामों सहित शहर के हजारों लोगों के नाम मतदाता सूची से गायब हैं। इनमें सांसद राजेंद्र अग्रवाल और उनके परिवार तक का नाम मतदाता सूची से गायब हो चुका है।
यहीं नहीं नए परिसीमन के बाद बूथों का निर्धारण भी दोबारा होना था, लेकिन नगर निगम और निर्वाचन कार्यालय वह भी नहीं कर पाया। जिस कारण जब बूथ ही तय नहीं हुए तो बीएलओ भी मतदाताओं को नजर नहीं आए। इसके अलावा बीएलओ अपने अपने बूथों पर बैठे या नहीं, इसकी भी सही तरह मॉनिटरिंग नहीं हुई। तमाम लापरवाही के बीच सोमवार को मतदाता सूची पुनरीक्षण की अंतिम तिथि निकल गयी और अभी भी नगर निगम क्षेत्र के हजारों मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब हैं। वह अपना नाम दर्ज कराने को आवेदन तक नहीं दे पाए।
आरटीआई से मांगी सूचना
इस मामले में सच संस्था के अध्यक्ष संदीप पहल एडवोकेट ने अपनी व परिवार की वोट षड्यंत्र के तहत काटे जाने का आरोप लगाते हुए आरटीआई में सूचना मांगी है। संदीप पहल ने पुरानी मतदाता सूची की कॉपी पत्र के साथ देते हुए कहा है कि इस तरह वोट का काटा जाना पूरी तरह षड्यंत्र दर्शाता है। इसलिए निर्वाचन कार्यालय स्वयं उनका व उनके परिवार का नाम दर्ज कराये। वहीं संदीप पहल ने बताया कि वह इस पूरे मामले पर कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
कैंट विधायक ने भी की शिकायत
इस मामले पर कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल ने भी राज्य निर्वाचन आयोग में शिकायत की है। सत्यप्रकाश अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि अधिकतर बूथों पर बीएलओ मौजूद नहीं रहे। जिस कारण वोट बढ़ाने और कटवाने का काम प्रभावित हुआ। इसके अलावा शहर में बड़ी संख्या में नई कॉलोनियां विकसित हुई, लेकिन वहां रहने वाले लोगों के वोट नहीं बने हैं। महानगर से हजारों की संख्या में लोग मतदाता सूची से वंचित रह गए हैं। इसलिए मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम कम से कम एक सप्ताह और बढ़ाया जाए।