पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार मेरठ की किसान पंचायत में जुटी भीड़ से केजरीवाल गदगद हैं। पार्टी इस सिलसिले को आगे बढ़ाना चाहती है, ताकि पंचायत चुनाव तक वह ग्रामीण क्षेत्रों और खासकर किसानों के बीच खुद को स्थापित कर सके।
अब ऐसी ही अगली किसान महापंचायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूर्व संसदीय क्षेत्र गोरखपुर या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आयोजित की जानी है। अगली महापंचायत गोरखपुर में होने की संभावना ज्यादा प्रबल है।
पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने भी गोरखपुर का ही प्रस्ताव दिया है। अंतिम फैसले के लिए पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने आज लखनऊ के आसपास के नेताओं की बैठक बुलाई।
इस बीच पार्टी ने जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में भागीदारी के लिए भी पूरी तैयारी कर ली है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत सिंह का कहना है कि हजारों आवेदन मिले हैं। आवेदनों की छंटनी और आवेदकों का सत्यापन हो चुका है।
भाजपा और रालोद समेत सभी दलों में मंथन शुरू
केजरीवाल की किसान महापंचायत में तमाम बिरादरियों की भागीदारी से भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलों में हलचल बढ़ गई है। सभी दल आम आदमी पार्टी के पहले कार्यक्रम में जुटी भीड़ के मद्देनजर पंचायत और विधानसभा चुनाव में संभावित नफा-नुकसान के मंथन में जुट गए हैं।
रालोद नेताओं की किसान महापंचायत पर खास नजर रही, क्योंकि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उसकी ओर से भी ऐसे ही आयोजन किए जा रहे हैं। महापंचायत में सहारनपुर से गौतमबुद्धनगर तक के नेताओं और पार्टी समर्थकों को प्रतिनिधित्व रहा। मुख्य मंच पर भी वैश्य, ब्राहमण, त्यागी, गुर्जर, जाट, पंजाबी, मुस्लिम और दलित बिरादरी के नेताओं को जगह दी गई।
इससे लोगों में संदेश गया कि आप के मंच पर साधारण कार्यकर्ता, खापों और बिरादरियों के स्थानीय नेता भी स्थान पा सकते हैं। मंच और सभा स्थल के बाहर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो बड़े किसान नेताओं पूर्व प्रधानमंत्री चौ. चरण सिंह और बाबा महेंद्र सिंह टिकैत की तस्वीरें और होर्डिंग योजना के तहत लगाए गए थे।
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