खामोश निगम, पैसा जनता का
नगर निगम के अधिकारी गुपचुप तरीके से कंपनी का भुगतान की तैयारी में हैं। इससे अधिकारियों का कुछ नहीं जाएगा, बल्कि जनता का पैसा बर्बाद हो रहा है। एक साल से नगर निगम ने स्ट्रीट लाइट पर कई करोड़ खर्च किए हैं। कंपनी से पैसा क्यों नहीं लिया जा रहा है, जिस पर अधिकारी चुप्पी साधे हैं। नगर निगम के अधिकारी 14 वित्त व अन्य विभाग से 20 करोड़ का भुगतान कराने की तैयारी में हैं।
कांवड़ मार्ग का सर्वे, 60 फीसदी लाइटें बंद
शहर के मुख्य मार्गों पर भी लाइटें नहीं जलतीं हैं। शहर के अंदर 60 फीसदी लाइटें बंद हैं। हजारों लाइटें तो गायब हैं। कांवड़ यात्रा पर नगर निगम ने सर्वे किया, जिसमें कई जगहों पर लाइटें ही नहीं मिलीं। बेगमपुल से हापुड़ अड्डे तक 32 लाइटें, मोदीपुरम से बेगमपुल तक 14 लाइटें, बेगमपुल से फुटबॉल चौराहे तक 19 लाइटें, दिल्ली रोड स्थित बहादुर मोटर्स से शॉप्रिक्स मॉल होते परतापुर फ्लाईओवर तक 54 लाइटें, हापुड़ अड्डे से गांधी आश्रम तक नौ लाइटें, एक हाई मास्ट लाइट, एक मिनी मास्ट लाइट बंद हैं। तेजगढ़ी के पास 21, मेडिकल के पास 25 और हापुड़ अड्डे से हापुड़ चुंगी तक 72 लाइटें बंद हंै। कांवड़ मार्ग पर निगम की अधिकांश लाइट बंद है। जिनको अब निगम ठीक कराने में लगा हुआ है।