मेरठ में करीब छह माह की एक गर्भवती महिला दर्द से कराहती रही, मगर उसे इलाज नहीं मिला। महिला को उसके परिजन महिला जिला अस्पताल (डफरिन) ले गए तो उन्होंने उसे जिला अस्पताल भेज दिया। वहीं जिला अस्पताल से उसे वापस महिला अस्पताल जाने की सलाह दे दी गई। वह घंटों इमरजेंसी में पड़ी रही। बाद में उसे मेडिकल अस्पताल के लिए रेफर किया गया।
पीड़िता हापुड़ की रहने वाली रेशमा है। महिला पति के साथ आई थी। महिला के परिजनों का कहना है कि हापुड़ के सरकारी अस्पताल में अल्ट्रा साउंड की मशीन खराब होने के कारण उन्हें मेरठ जाने के लिए कहा गया। वह मेरठ महिला जिला अस्पताल आए, लेकिन उनका अल्ट्रा साउंड नहीं किया गया, वहां से उन्हें कहा कि पीएल शर्मा अस्पताल चले जाएं। यहां इमरजेंसी आए तो यहां से कहा गया कि महिला जिला अस्पताल चले जाएं। महिला को काफी दर्द हो रहा था, इसलिए उसे इमरजेंसी के बाहर की बने स्लैब पर लिटा दिया गया। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने गुहार लगाई, पर इलाज नहीं किया।
दो बजे के बाद नहीं होता अल्ट्रासाउंड
वहीं, महिला जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डॉ. मंजू मलिक का कहना है कि उनके यहां एक ही चिकित्सक हैं जो अल्ट्रा साउंड करती हैं। यहां अल्ट्रा साउंड सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक होता है। इसके बाद आने वालों का अल्ट्रा साउंड नहीं होता है।
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