स्मार्ट सिटी के प्रपोजल प्रस्ताव को लेकर बुधवार को टाउन हॉल में बुलाई गई निगम की बोर्ड बैठक में प्रपोजल पास करने पर पूरा सदन एकजुट दिखाई दिया। शहर में सफाई, पानी और लाइट की व्यवस्था की बात आते ही सदन में हंगामा हो गया। माइक पर बोलने को लेकर पार्षदों में हाथापाई हो गई। मौके पर पहुंची पुलिस से भी पार्षद भिड़ गए।
बुधवार को महापौर हरिकांत अहलुवालिया की अध्यक्षता और नगरायुक्त देवेंद्र कुमार कुशवाहा के संचालन में तिलक हॉल में स्मार्ट सिटी प्रपोजल प्रस्ताव पास करने के लिए बैठक बुलाई गई।
इसमें सांसद राजेंद्र अग्रवाल, विधायक डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल, मेरठ दक्षिण विधायक रविंद्र भड़ाना भी पहुंचे। प्रपोजल प्रस्ताव के पास होने के बाद पार्षद पंकज कतीरा ने कूड़ा निस्तारण के अनुबंध को लेकर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि जब निगम प्रशासन कूड़ा निस्तारण का अनुबंध किसी कंपनी से कर चुका है तो अब सदन में पास कराए जाने का क्या औचित्य है।
यदि इस अनुबंध में फर्जीवाड़ा हुआ तो निगम के अधिकारी जिम्मेदार होंगे। महापौर हरिकांत अहलुवालिया ने कहा कि कूड़ा निस्तारण केंद्र संचालित किए जाने के लिए जो अनुबंध किया गया है वह सदन की प्रत्याशा में हुआ है। नगरायुक्त ने कहा कि गांवड़ी में केवल आठ एकड़ भूमि 25 साल के लिए सीवरी ग्रीन एनर्जी प्रा.लि. को लीज पर दी गई है। डंपिंग सेंटर तक कूड़ा निगम अपने संसाधनों से पहुंचाएगा। इस पर पार्षद राजू वर्मा और किशन कन्हैया ने कहा कि डोर टू डोर कूड़ा उठने की व्यवस्था की जाए। यदि ऐसी व्यवस्था नहीं बनी तो शहर स्मार्ट सिटी नहीं बन सकता। पार्षद पंकज कतीरा, दीवानजी शरीफ आदि ने आरोप लगाया कि आउट सोर्सिंग पर काम करने वाले सफाई कर्मी शत प्रतिशत डयूटी नहीं कर रहे हैं। त्योहार सिर पर हैं। शहर की हालत बेहद खराब है।
प्रतिमाह 10 से 15 लाख रुपयों का भुगतान सफाई कर्मियों के नाम पर फर्जी तरीके से निकाला जा रहा है। पार्षद किशन कन्हैया ने कहा कि पूर्व पास प्रस्ताव के अनुसार पार्षद को अधिकार दिया जाए कि वह अपने वार्ड में तैनात सफाई कर्मचारियों की हाजिरी लें। इस पर काफी देर तक हंगामा होता रहा। नगरायुक्त ने यानी पहले शासन के आदेशों का अवलोकन करने की बात कहकर टाल दिया। महापौर ने पार्षदों की मांग पर विचार करने के लिए 11 जुलाई को फिर से बोर्ड बैठक बुलाई जाएगी।
माइक को लेकर आपस में भिड़े पार्षद
मेरठ। दोपहर लगभग एक बजे पार्षद सुशील सैनी बोर्ड बैठक में पहुंचे। उस समय पार्षद किशन कन्हैया सफाई की समस्या पर बोल रहे थे। जैसे ही उन्होंने ब्रेक लिया तो सुशील सैनी ने किशन कन्हैया से माइक लेना चाहा। जिसको लेकर दोनों पार्षदों में खींचातानी शुरू हो गई।
किशन कन्हैया के पक्ष में अन्य भाजपा पार्षद राजीव गुप्ता, सेंसरपाल, तरुण गोयल आ गए। उस समय तो बीच बिचाव हो गया। लेकिन 20 मिनट बाद जैसे ही सुशील सैनी ने बोलने के लिए माइक थामा तो पार्षद गजेंद्र कुमार ने वेल में आकर सुशील से माइक छीन लिया। पार्षद सुशील ने कहा कि एक सप्ताह के भीतर सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था नहीं की गई तो जनता को साथ लेकर महापौर के आवास पर धरना देंगे।
सांसद ने रखा गोबर के निस्तारण का प्रस्ताव
सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने निगम बोर्ड बैठक में कहा कि जिस प्रकार से कूड़ा निस्तारण पर कदम उठाया जा रहा है उसी प्रकार गोबर निस्तारण पर भी कदम उठाया जाना चाहिए। इसके लिए भले ही डेयरियों संचालकों से शुल्क वसूली हो। गोबर की कंपोस्ट खाद तैयार की जाए। इसकी शुरूआत मेरठ से ही पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में हो। ऐसा हमारा मानना है। इस प्रस्ताव को बोर्ड ने सराहा।
सफाई व्यवस्था ठप करने की चेतावनी
मेरठ। सदन में पार्षदों द्वारा की गई सफाई कर्मचारियों की हाजिरी के अधिकार की मांग पर सफाई कर्मचारी नेता बिफर गए हैं। सफाई कर्मचारी संघ के महामंत्री कैलाश चंदौला साथियों के साथ सदन में पहुंचे। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर सफाई कर्मचारियों का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कुछ पार्षद अपने निजी लालच में सफाई कर्मचारियों की हाजिरी लगाने का अधिकार लेना चाहते हैं। जबकि यह अधिकार सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों का होता है। कैलाश चंदोला ने चेतावनी दी कि यदि पार्षदों ने हाजिरी लगाने का प्रयास किया और निगम अधिकारियों पर अनैतिक दबाव बनाया तो शहर की सफाई व्यवस्था ठप कर दी जाएगी।