-स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर आरएसएस के 6500 स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो गए। इस शताब्दी वर्ष में एक साल तक कार्यक्रम आयोजित होंगे। बृहस्पतिवार को मेरठ के दोनों महानगरों में 50 स्थानों पर 6500 स्वयंसेवकों ने पथ संचलन किया। संघ के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख राजकुमार मटाले ने कहा कि शक्ति ही शांति का आधार है। इसलिए शक्ति संपन्न होना आवश्यक है।
सभी कार्यक्रमों में एकल गीत, गण गीत के बाद शस्त्र पूजन हुआ। मुख्य वक्ता ने संघ के विचार के विषय में बताया। पथ संचलन में बच्चे, तरुण स्वयंसेवक और वृद्ध सभी कदम से कदम मिलाकर चले। जगह-जगह पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। महानगर में कई स्थानों पर संघ की प्रदर्शनी भी लगाई गई। इसमें संघ के प्रमुख कार्यक्रम दिखाए गए। 1998 में हुआ समरसता महाशिविर, 25 फरवरी 2018 में जागृति विहार में हुआ राष्ट्रोदय कार्यक्रम, मेरठ महानगर और प्रांत के ऐसे अनेक वरिष्ठ स्वयंसेवकों का जीवन दर्शन प्रदर्शनी के माध्यम से दिखाया गया।
शक्ति और साधना की प्रेरणा देता है पर्व
बागपत रोड पर द्वारिकापुरी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजकुमार मटाले ने कहा कि विजयदशमी का पर्व हमें साधना और शक्ति दोनों की प्रेरणा देता है। नवरात्र के नौ दिनों में संपूर्ण देश भक्ति-भाव से पूजा अर्चना करके आत्म-अवलोकन करता है और अपने भीतर श्रेष्ठ मूल्यों को जागृत करने का प्रयास करता है। उन्होंने कहा कि शक्ति व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों के लिए आवश्यक है। हमारे शास्त्र शक्ति के प्रतीक हैं। इसीलिए उनका पूजन पूरे देशभर में किया जाता है। भारत में जहां आध्यात्मिक साधना होती है, वहीं शस्त्रों का भी पूजन होता है।
उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने 1925 को नागपुर से ‘शाखा’ पद्धति की शुरुआत की। केवल 15 वर्षों में ही डॉ. हेडगेवार ने हिंदू समाज को यह विश्वास दिला दिया कि हिंदू समाज भी संगठित हो सकता है और संघ के कार्य को देशव्यापी स्वरूप दिया। आज संघ शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है। महानगर में हुए विभिन्न कार्यक्रमों में क्षेत्र प्रचारक महेंद्र, क्षेत्र के सह संघचालक प्रो. नरेंद्र तनेजा, क्षेत्र बौद्धिक प्रमुख रूप नारायण, सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख तपन कुमार, प्रांत प्रचार प्रमुख सुरेंद्र कुमार, प्रांत सेवा प्रमुख अशोक कुमार आदि रहे।