मेरठ में नहीं होगी कटौती
मेरठ जनपद की दौराला, किनौनी, मवाना और नगलामल चीनी मिल सीजन में 120 मेगावाट बिजली उत्पादित करती हैं। प्रोत्साहन मिलने पर चारों शुगर मिलों की बिजली उत्पादन क्षमता 200 मेगावाट तक बढ़ाई जा सकती है। मेरठ में बिजली आपूर्ति और मांग में करीब 200 मेगावाट का अंतर है।
इस अंतर को ये चारों मिल आसानी से भर सकती हैं। वर्तमान में इन चारों मिलों का भी प्रदेश सरकार पर बकाया चल रहा है। मोहिउद्दीनपुर मिल में भी 15 मेगावाट का प्लांट लगा है। हालांकि यहां अभी ग्रिड की लाइन नहीं बनने से 10 मेगावाट बिजली की बिक्री नहीं हो पा रही है। शुगर मिल में केवल 5 मेगावाट बिजली यूज हो रही है।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के अनुसार, वर्तमान में शुगर मिलों का प्रदेश सरकार पर को-जनरेशन का करोड़ों रुपया बकाया है। अगर सरकार बिजली बकाये का समय से भुगतान करे और प्लांट लगाने पर अनुदान देने के अलावा पावर स्टेशन लगाने में मदद करे, तो चीनी मिल करीब 8 हजार मेगावाट तक बिजली उत्पादित कर सकती है।
नई शुगर मिल छूट नीति से बढ़ सकता है उत्पादन
उत्तर प्रदेश सरकार ने नए शुगर मिल लगाने पर छूट नीति जारी की है। इसमें को-जनरेशन प्लांट में छूट के अलावा कोयला आधारित विद्युत प्लांट लगाने का भी विकल्प रखा गया है। इस प्लांट से सीजन के बाद भी बिजली उत्पादन किया जा सकता है।
...हालांकि बढ़ेगा प्रदूषण
यदि मिलों को बिजली उत्पादन के लिए कोयला उपलब्ध कराया गया, तो इससे बिजली बनाने में प्रदूषण फैलेगा। हालांकि मिलों का दावा है कि ऐसे उपकरण आ गए हैं, जिनसे कोयला जलाने पर नाममात्र के लिए ही प्रदूषण फैलेगा।
बिजली बनाने वाली शुगर मिलें
मेरठ 5, बागपत 2, गाजियाबाद 1, मुरादाबाद 1, रामपुर 1, बदायूं 1, बिजनौर 5, जेपीनगर 1, बरेली 2, मुजफ्फरनगर 8, सहारनपुर 4
जनपद संख्या
बाराबंकी 2, गौंडा 4, पीलीभीत 4, सीतापुर 3, बलरामपुर 1, लखीमपुर खीरी 6, अंबेडकरनगर 1, फैजाबाद 1, शाहजहांपुर 2, बहराइच 2, हरदोई 2
प्लांट लगाने में सहयोग करे सरकार
बगास से बिजली तैयार होने पर पेराई सीजन में ही बिजली का उत्पादन हो पाता है। अगर मिलों द्वारा पूर्व में दी गई बिजली का भुगतान किया जाए। साथ ही बिजली प्लांट लगाने में सरकार सहयोग करे, तो भरपूर बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। - दीपक गुप्तारा, जनरल सेक्रेटरी, इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन
इस दिशा में काम हो
मिलों द्वारा को-जनरेशन से जो बिजली बनाई जाती है, वह प्रदेश की विद्युत की खपत को पूरा करने में बेहद मददगार है। लेकिन इसका उत्पादन सीजनल है, जो पांच-छह महीनों में ही हो पाता है। अगर मिलें सालभर बिजली का उत्पादन करेंगी, तो बिजली का संकट ही दूर हो जाएगा। इस दिशा में काम किया जाना चाहिए। - आशुतोष निरंजन, पीवीवीएनएल एमडी