यह हुई थी घटना
1 मार्च, 2018 को जली कोठी स्थित पटेल नगर में दुकानदार अरमान से वाहन माफिया हाजी गल्ला के बेटे शादाब का विवाद हुआ था। शादाब के साथ दरोगा मनोज कुमार का बेटा मोहित चौधरी व उसके अन्य दोस्त मौजूद थे।
गोलीबारी के दौरान उधर से गुजर रहा राहगीर अजय उर्फ टिंकू निवासी टीपी नगर की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मामले में मोहित, इकराम, शादाब, हाजी गल्ला समेत 11 आरोपी नामजद हुए। गल्ला समेत नौ आरोपियों को पुलिस ने जेल भेजा, जबकि दो आरोपी मोहित और इकराम फरार चल रहे थे। दोनों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।
तीन बार बदली विवेचना
दरोगा का बेटा हत्या में नामजद था। उसको बचाने के लिए अधिकारियों की सिफारिशें खूब हुईं। विवेचना सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला को दी गई। सीओ की रिपोर्ट पर कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी हुए। फिर जांच सीओ कार्यालय हरिमोहन सिंह को सौंपी, फिर तत्कालीन सीओ ब्रह्मपुरी अखिलेश भदौरिया को दी। विवेचना आगे बढ़ी। ब विवेचक सीओ ब्रह्मपुरी हरिमोहन सिंह हैं।
25-25 हजार का इनाम भी कटेगा
इस मामले की विवेचना वर्तमान में सीओ ब्रह्मपुरी हरिमोहन सिंह को सौंपी गई। सीओ ब्रह्मपुरी की रिपोर्ट में मोहित व इकराम को क्लीनचिट दे दी गई। उसके बाद दोनों नामजद आरोपियों के ऊपर 25-25 हजार का नाम काटने के संबंध में एक प्रार्थना पत्र डीआईजी अखिलेश कुमार को भेजा गया है। जिसका अभी परीक्षण चल रहा है। सीओ की रिपोर्ट में मोहित और इकराम के नाम निकाल देने पर सवाल उठ रहे हैं।
क्यों हुआ इतना बखेड़ा
अजय उर्फ टिंकू की हत्या होने पर सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया था। तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी खुद थाने पहुंची थीं। एसएसपी के निर्देशन में ताबड़तोड़ दबिश में उसी रात हाजी गल्ला का बेटा शादाब, निखिल और आमिर को गिरफ्तार किया गया।
तीनों से पूछताछ में दरोगा के बेटे मोहित का नाम सामने आया। मोहित को मुख्य आरोपी बनाकर एसएसपी मंजिल सैनी ने 11 लोगों को नामजद कराया था। यह मामला हत्या और एससी-एसटी एक्ट में दर्ज था। बावजूद केस में खूब खेल हुआ। तभी से अपने बेटे को बेकसूर बताकर दरोगा पैरवी कर रहे थे।
वादी व गवाहों ने शपथपत्र दिए थे। जिसके आधार पर मोहित और इकराम का नाम मुकदमे से निकाला गया है। मुझसे पहले विवेचकों द्वारा पूरी रिपोर्ट तैयार हो चुकी थी। हालांकि अभी विवेचना चल रही है। -हरिमोहन सिंह, सीओ ब्रह्मपुरी (विवेचक)