मोदीपुरम। पैदल की जाने वाली विश्व की सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा (कांवड़ यात्रा) अब अपनी पहचान डाक कांवड़ (दौड़ कांवड़) के रूप में बना रही है। साल दर साल खासतौर से युवाओं में डाक कांवड़ का क्रेेज बढ़ रहा है। इसके पीछे युवाओं का मानना है कि भक्ति के साथ-साथ सेहत भी इससे दुरुस्त रहती है।
पुरुषों के साथ-साथ अब महिलाएं और बच्चे भी कांवड़ ला रहे हैं। पैदल, दंडवत के साथ युवाओं में डाक कांवड़ का भी क्रेज बढ़ रहा है। पिछले तीन सालों से डाक कांवड़ लेकर आ रहे एक ग्रुप के युवा रवि ने बताया कि डाक कांवड़ से समय की खासी बचत होती है। शारीरिक फिटनेस भी ठीक रहती है। रवि के अनुसार एक दल में करीब 15 युवा होते हैं। जो हरिद्वार, गौमुख, नीलकंठ आदि जगहों से गंगाजल लेने के बाद बारी-बारी से दौड़ लगाकर मंजिल की ओर रवाना होते हैं। एक शिवभक्त के हिस्से में करीब 20 किलोमीटर की दौड़ आती है। दौड़ते समय जल को एक साथी दूसरे को सौंपता है। इस दौरान ध्यान रखा जाता है कि वह खंडित न हो।
धीरे-धीरे कम होती है दौड़
रवि ने बताया कि शुरुआत में एक भोला 3 किलोमीटर की दौड़ लगाता है। धीरे धीरे यह दायरा कम होते-होते 500 मीटर पर आ जाता है। इसी ग्रुप के मोहन का कहना है कि पहले की तुलना में डाक कांवड़ लाने का चलन बढ़ा है। इसका कारण है कि अधिकतर युवा सेना, पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे होते हैं। वह भक्ति के साथ अपनी फिटनेस जांचने के लिए भी यह यात्रा करते हैं।
ऐसे ले जाते हैं गंगाजल
मेरठ और आसपास के क्षेत्रों के हरिद्वार की दूरी करीब 150 किलोमीटर है। यह दूरी को ग्रुप टुकड़ों में बांट लेता है। एक के बाद एक साथी दौड़ लगाता है। उनके साथ चल रहे वाहन में जलपान की व्यवस्था होती है। थकने पर युवा उसी में आराम भी करते हैं। शिवरात्रि से एक दो दिन पहले इनकी संख्या बढ़ जाती है।
आस्था देती है जोश
हम चार साल से डाक कावंड़ ला रहे हैं। इस यात्रा में लगातार दौड़ना बहुत कठिन है, लेकिन हमारी आस्था हमारे जोश को कम नहीं होने देती। यह युवाओं के दमखम पर भी निर्भर करती है। -कालू, डाक कांवडियां, दिल्ली
करनी पड़ती है तैयारी
डाक कांवड़ को तय समय में ही पूरा करना होता है और मंदिर में पहुंचकर जलाभिषेक करना होता है। उसी के हिसाब से तैयारी करनी पड़ती है। बीते चार सालों में इनकी संख्या बढ़ी है। -सुखदेव सिंह, डाक कांवडियां
भोले करेंगे बेड़ा पार
हरिद्वार से दिल्ली के लिए हमने 24 घंटे का समय तय किया है। लगातार दौड़ने के कारण कुछ भोले की तबियत भी खराब हो जाती है, लेकिन भगवान भोलेनाथ सबका बेड़ा पार करेंगे। -दिलीप, डाक कांवडियां
भक्ति में शक्ति है
डाक कांवड़ के लिए हमारी टीम ने एक माह तैयारी की। टीम के 22 युवा तैयारी में लगे थे। हरिद्वार से मेरठ तक कोई परेशानी नहीं हुई। दिल्ली भी समय से पहुंच जाएंगे। भोले की भक्ति में शक्ति है। -सुखदेव, डाक कांवडिया