संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में विराजमान श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा के सम्मुख श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाष्टक के पाठ से हुआ। आर्यिका पूर्णमती माता ने महामंत्रों का वाचन किया। इसके उपरांत श्री शांतिनाथ भगवान का महामस्तिकाभिषेक विधिविधान से प्रारंभ हुआ।
सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य खेमचंद पवन कुमार जैन को प्राप्त हुआ। प्रथम कलश एवं शांतिधारा खेमचंद, पवन कुमार जैन, श्यामा जैन, अजय जैन, राहुल जैन ने सपरिवार की। श्रद्धालुओं ने भी महामस्तिकाभिषेक कर पुण्य अर्जित किया।
आर्यिका पूर्णमती माता ने कहा कि हस्तिनापुर की पावन भूमि अत्यंत पवित्र है। यही वह धरती है जहां आदिनाथ भगवान को प्रथम आहार प्राप्त हुआ तथा श्री शांतिनाथ, कुंथुनाथ और अरहनाथ भगवान के गर्भ, जन्म, तप एवं केवल ज्ञान जैसे प्रमुख कल्याणक हुए। उन्होंने बताया कि इसी भूमि पर महामुनि विष्णु कुमार ने 700 मुनियों की रक्षा कर धर्म की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की।
आर्यिका माता ने कहा कि श्री शांतिनाथ भगवान की आराधना अत्यंत फलदायी है जो मानसिक शांति के साथ-साथ शारीरिक कष्टों से मुक्ति दिलाती है। शांतिनाथ विधान समस्त विघ्न-बाधाओं, ग्रह दोषों एवं रोगों को दूर कर सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करता है। इस विधान से धन, यश, विद्या और वैभव की प्राप्ति होती है तथा यह भक्त को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है।
इस मौके पर क्षेत्र अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, मंत्री राजीव जैन, विजय कुमार जैन, क्षेत्र प्रबंधक मुकेश जैन, उमेश जैन, अतुल जैन, कमल जैन व अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।