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सरकारी रसोई के इंतजार में भूखे बैठे हैं गरीब परिवार

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सरकारी रसोई के इंतजार में भूखे बैठे हैं गरीब परिवार
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मेरठ। सरकार भले ही किसी व्यक्ति को भूखा न सोने देने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई यह है कि महानगर में ही काफी परिवार ऐसे हैं जो खाना न मिलने के कारण भूखा सोने को मजबूर हैं। ऐसे ही 25-30 परिवार घोरावल क्षेत्र के शेखपुरा में सामने आए हैं। अब तक तो क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इन परिवारों को भोजन कराया, लेकिन तीन-चार दिन से सामाजिक संस्थाओं ने भी इधर खाना पहुंचाना बंद कर दिया है। जिसके कारण उन परिवारों के छोटे-छोटे बच्चे भूखे सोने को मजबूर हैं।
शुक्रवार को अमर उजाला संवाददाता ने घोरावल निवासी समाजसेवी भरत सिंह सैनी के माध्यम से शेखपुरा के परिवारों से बातचीत की। पता चला कि खाना न मिलने के कारण एक टाइम भूखा रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। शेखपुरा में 25-30 परिवार झुग्गी डालकर पिछले काफी समय से रह रहे हैं। इनमें से कुछ परिवार के सदस्य तो मजदूरी करते थे और कुछ मांग कर भी अपना गुजारा कर रहे थे। लॉकडाउन होने के बाद से इन परिवारों को कहीं मजदूरी नहीं मिल रही है, जिसके कारण अब यह सभी परिवार भूखे मरने की स्थिति में आ गए हैं। शहर के बाहरी क्षेत्रों में रह रहे मजदूरों के इन परिवारों तक राशन पहुंचाने की जिला प्रशासन पहल कर रहा है।
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सर्वे को पहुंची एएनएम से भी गरीबों ने लगाई गुहार
शुक्रवार को शेखपुरा क्षेत्र में कुछ महिला कर्मचारी घर-घर का सर्वे करने पहुंची। इन परिवारों ने उनके सामने भोजन दिलाने की गुहार लगाई। मौके पर पहुंचे समाजसेवी भरत सिंह सैनी ने गरीबों को भोजन दिए जाने के लिए नगर निगम में संचालित रसोई में तैनात कर्मचारी नेताओं से भी निवेदन किया। शुक्रवार देर रात तक इन गरीबों तक सरकारी रसोई से खाने की कोई मदद नहीं मिल सकी।
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समाजसेवी संस्थाएं भी बैकफुट पर
भाजपा महानगर अध्यक्ष के नजदीकी एवं भाजपा महानगर सदस्य के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से भाजपाइयों की मोदी रसोई बंद हो गई है। वहीं शहर में गरीबों तक राशन पहुंचाने का काम करने वाली सामाजिक संस्थाओं ने भी कोरोना के भय के चलते अपने कदम वापस खींच लिए हैं। जिसका परिणाम यह हुआ कि अब गरीब मजदूर परिवार भूखे सोने को मजबूर हो रहे हैं। समाजसेवी भरत सिंह सैनी का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र के उन गरीब परिवारों की सूची जिला प्रशासन द्वारा संचालित रसोई में खोले गए शिकायत प्रकोष्ठ में भी दी थी, लेकिन किसी को खाना नहीं मिल पाया। शिकायत केंद्र पर मौजूद कर्मचारी कोई संतुष्ट जवाब भी नहीं दे पाए।
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