निकाय चुनाव से पहले गठित होगी सपा की जिला कार्यकारिणी, पदों के लिए रहेगी खींचतान
आठ माह से भंग है सपा की जिला कार्यकारणी
मेरठ। आठ माह से भंग सपा की जिला कार्यकारिणी का जल्द गठन हो सकता है। उम्मीद निकाय चुनाव से पहले की है। दरअसल, राष्ट्रीय कार्यकारणी के गठन के बाद यह उम्मीद जगी है। मेरठ में कई नेता जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष की दौड़ में हैं। आपस में रस्साकशी के आसार हैं।
जिलाध्यक्ष पद की दौड़ में निवर्तमान जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह के अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह, ओमपाल गुर्जर, जितेंद्र गुर्जर और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान समेत कई नाम चल रहे हैं। ओमपाल गुर्जर पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर के करीबी माने जाते हैं। राजपाल सिंह, अखिलेश के करीबी पार्टी प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी के नजदीकी हैं। जिलाध्यक्ष पद पर होने वाली दौड़ में बाजी कोई भी मारे, लेकिन चुनौतियां बहुत हैं। न केवल विपक्ष की भूमिका का मेरठ में सही तरह से निर्वहन करना होगा बल्कि पार्टी के सभी धड़ों को एकसूत्र में बांधना होगा। यह इतना आसान नहीं है क्योंकि मुख्य रूप से तीन धड़ों के इर्द गिर्द घूमने वाली सपाई राजनीति में बाकी दो धड़े भी अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।
इसी तरह महानगर अध्यक्ष पद की दौड़ में निवर्तमान महानगर अध्यक्ष आदिल चौधरी के अलावा जानू चौधरी, इसरार सैफी, गुलशेर राणा, बदर अली और शकील भारती आदि हैं। सपा के दिग्गज माने जाने वाले नेता भी अपने-अपने करीबी को महानगर अध्यक्ष बनाना चाहते हैं।
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विपक्ष की भूमिका में सपा से आगे दिख रही रालोद
प्रमुख विपक्षी पार्टी होने का बावजूद जिले में कार्यकारिणी न होने के कारण सपा के मुकाबले विपक्ष के तौर पर रालोद आगे नज़र आ रही है। कार्यकारिणी के अलावा इसकी वजह यह भी है कि सपाइयों में गुटबाजी ज्यादा है। पिछले विधानसभा चुनाव में सपा और रालोद गठबंधन से चुनाव लड़े। अच्छा प्रदर्शन किया। सात में से 4 विधानसभा सीटें जीती हैं। सिवाल खास से विधायक गुलाम मोहम्मद वैसे रालोद के टिकट पर लड़े थे, लेकिन वह सपाई हैं, इस लिहाज से देखें तो चारों विधायक सपा से जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद सपा मजबूत नजर नहीं आ रही है। पिछले साल जून में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने प्रदेश की सभी जिला कार्यकारिणीयों को भंग कर दिया था।