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प्रदूषण : गले में संक्रमण...खांसी-जुकाम के बढ़े मरीज

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मेरठ। इन दिनों लोग प्रदूषण की मार से जूझ रहे हैं। पऱदूषण का स्तर कभी 300 से ज्यादा तो कभी इसके आसपास चल रहा है। इसका सीधा लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। गले में संकऱमण हो रहा है और खांसी-जुकाम के मरीज बढ़ रहे हैं। सांस लेने में तकलीफ और आंखों में जलन जैसी समस्याओं से भी लोग जूझ रहे हैं। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज और पीएल शर्मा जिला अस्पताल में सांस व गले की समस्या वाले मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। खासतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है।
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मेडिकल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. नवरत्न ने बताया कि बाल रोग वार्ड के 110 बेड़ों में से 95 पर मरीज भर्ती हैं जिनमें 35 बच्चे सांस व गले की समस्या के शिकार हैं। प्रदूषण और बदले मौसम ने बच्चों को ज्यादा प्रभावित किया है। घरघराहट, तेज खांसी, बुखार, गले में खराश जैसे लक्षण सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। पीएल शर्मा जिला अस्पताल में भी मरीजों की भीड़ है। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, गले के इंफेक्शन और सांस लेने में परेशानी वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पताल के नाक-कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. बीपी कौशिक ने बताया कि पहले जहां इस तरह के रोजाना 50-60 ऐसे मरीज आते थे, अब पिछले 10 दिन से यह आंकड़ा 100-125 पहुंच गया है।
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बचाव के लिए यह उपाय अपनाएं

- घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनें या रूमाल से नाक-मुंह ढक लें।

- छोटे बच्चे, बुजुर्ग और सांस रोगी सुबह और शाम बाहर जाने से बचें।
- गुनगुने पानी से गरारे और गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें।

- दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं ताकि गले की सूजन कम हो।
- घर के अंदर एयर प्यूरीफायर या पौधे रखें, यह फेफड़ों को राहत देंगे।

- धूल मिट्टी से बचें, घर की सफाई नियमित करें।
- सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी, तेज बुखार या गले में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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