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साठ हजार प्रतिबंधित वाहन मेरठ में फैला रहे प्रदूषण, अब भी चल रहीं 25 साल पहले बंद हो चुकी मेटाडोर 

Sat, 23 Nov 2019 03:39 PM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
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प्रदूषण का खतरनाक स्तर - फोटो : अमर उजाला
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एनजीटी के आदेश के बाद भी मेरठ जिले में 60 हजार से ज्यादा प्रतिबंधित वाहन दौड़ रहे हैं। यह वाहन प्रदूषण और जाम की भी वजह बन रहे हैं। आरटीओ के नोटिस भेजने के बाद करीब बीस हजार लोगों ने ही प्रतिबंधित वाहनों की एनओसी ली है। हर महीने ऐसे वाहनों की संख्या बढ़ती जा रही है।

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अप्रैल 2015 में एनजीटी ने दिल्ली और एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों का संचालन प्रतिबंधित कर दिया था। आदेश के खिलाफ ट्रांसपोर्टरों ने जमकर आंदोलन किए और एनजीटी में रिट दायर कर राहत मांगी, लेकिन राहत नहीं मिली।

दिल्ली और आसपास प्रदूषण के खतरनाक स्तर ने लोगों की सांस पर पहरा लगा दिया है। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली समेत एनसीआर में प्रतिबंधित किए गए वाहनों को पकड़कर सीज करने के आदेश दिए थे। मेरठ में इसके अनुपालन में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।

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जिले में 60 हजार से ज्यादा प्रतिबंधित वाहन दौड़ रहे
मेरठ में एनजीटी के आदेश के बाद 31 अक्तूबर 2007 से पहले के 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल चालित करीब 50 हजार वाहन थे। करीब 10 हजार वाहन डीजल और 40 हजार वाहन पेट्रोल श्रेणी के थे। परिवहन अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल करीब 60 हजार वाहन प्रतिबंधित श्रेणी में आ रहे हैं। इसमें यूपी-15 आर सीरीज से पहले के पेट्रोल और यूपी-15 टी सीरीज से पहले के डीजल वाहन शामिल हैं।

करीब 20 हजार वाहनों ने ली एनओसी, गए बाहर
आरटीओ के मुताबिक एनजीटी के आदेश के बाद अब तक करीब 20 हजार प्रतिबंधित वाहनों की एनओसी ली गई है। इसमें करीब 15 हजार वाहन डीजल के और 5000 वाहन पेट्रोल वाले हैं। ये वाहन एनओसी लेकर एनसीआर के बाहर के जिलों में रजिस्टर्ड हो गए हैं।
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25 साल पहले बंद हो चुकी मेटाडोर भी चलन में
जिले में करीब 20 हजार से ज्यादा वाहन ऐसे हैं जो बाहरी राज्यों में रजिस्टर्ड हैं और इनका संचालन यहां पर हो रहा है। इसमें दिल्ली व हरियाणा नंबर के वाहन सबसे ज्यादा हैं। डीजल ट्रक तो 30 से 40 साल पुराने भी सड़कों पर दौड़ते मिल जाते हैं। स्कूल बसें भी 10 साल से ज्यादा पुरानी हो चुकी हैं। नामचीन स्कूलों में भी 25 साल पहले बंद हो चुकी मेटाडोर तक चल रही हैं।

सीज वाहनों को खड़ा करने की समस्या
प्रवर्तन टीमें प्रतिबंधित वाहनों को रोजाना सीज कर रही हैं। पुलिस थानों में जगह नहीं होने की बात कहकर सीज वाहनों को खड़ा करने से मना किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराया जा रहा है। जब्त वाहनों को खड़ा करने का स्थान देखा जा रहा है। वाहन स्वामियों को एनओसी लेने के लिए नोटिस भी भेजे गए हैं। -डॉ. विजय कुमार, आरटीओ मेरठ
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