वर्तमान में ध्वनि प्रदूषण का हाल
- बेगमपुल 70.0
- रेलवे रोड 65.2
- थापरनगर 62.6
- शास्त्रीनगर 60.0
- पल्लवपुरम 58.6
- कैंट अस्पताल 61.4
ध्वनि प्रदूषण डेसिबल में है, जिसका सामान्य मानक 40 से 50 होना चाहिए यानी शहर में आम दिनों में ही ध्वनि प्रदूषण मानक से ऊपर है, जबकि दिवाली तक यह और भी बढ़ जाता है। दिवाली पर बेगमपुल पर ध्वनि प्रदूषण 80 से ऊपर पहुंच जाता है। ऐसा ही हाल, थापरनगर, शास्त्रीनगर और अन्य क्षेत्रों का भी है।
ईको फ्रेंडली दिवाली मनाने पर दें जोर
प्रदूषण नियंत्रण विभाग का मानना है कि शांत क्षेत्रों में भी पटाखों का शोर और धुआं दोनों बढ़ रहे हैं जो चिंता का विषय है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ईको फ्रेंडली दिवाली मनाने पर जोर देना चाहिए और इसके लिए पहले से कार्ययोजना बने और जागरूकता पैदा की जाए। लेकिन पर्व उल्लास में पर्यावरण संरक्षण के प्रति लापरवाही नहीं रुकती है।
ऐसे होगी मॉनीटरिंग
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दिवाली पर शहर में अलग अलग हिस्सों को मॉनीटरिंग करता है। शहर में आवासीय क्षेत्र, कॉमर्शियल क्षेत्र और अंति संवेदनशील क्षेत्र के लिए अलग अलग प्वाइंट बनाकर मॉनीटरिंग की जाती है। दिवाली से एक सप्ताह पहले, दिवाली वाले दिन और फिर दिवाली से अगले दिन, तीन बार मॉनीटरिंग होती है। इससे पता चलता है कि सबसे ज्यादा ध्वनि प्रदूषण किस क्षेत्र में हुआ है।
अभी से हो रही बिक्री
चौबीस घंटे पहले ही मवाना क्षेत्र के सठला गांव में लाखों रुपये कीमत के पटाखे पकड़े गए हैं। पटाखों की बिक्री दशहरे से शुरु हो जाती है और जो दिवाली तक चलती है। अभी से ही पटाखों की बिक्री शुरू होने के साथ साथ छोटे दुकानदारों ने अपना स्टाक भी लगाना शुरू कर दिया है।
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