हस्तिनापुर। पवित्र गंगा नदी में प्लेज (कृत्रिम खेती) लगाकर की जा रही गतिविधियों से नदी का प्राकृतिक स्वरूप और जलीय जीवन गंभीर संकट में आ गया है। गंगा किनारे अवैध रूप से प्लेज लगाकर की जा रही खेती में केमिकल युक्त खाद और दवाओं का खुलेआम प्रयोग किया जा रहा है। साथ ही गंगा में मुर्गों के अवशेष और अन्य जैविक कचरा डाले जाने से जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन गतिविधियों से गंगा का पानी दूषित हो रहा है। इसका सीधा असर जलीय जीवों पर पड़ रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से संचालित डॉल्फिन, घड़ियाल और कछुआ संरक्षण परियोजनाएं खतरे में हैं। विशेषज्ञों के अनुसार केमिकल युक्त खाद और सड़े हुए अवशेषों से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है। इससे संवेदनशील प्रजातियों का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो गंगा की जैव विविधता को अपूरणीय क्षति हो सकती है। (संवाद)
प्रशासनिक अधिकारी बने अनजान
चिंताजनक बात यह है कि इस गंभीर समस्या के बावजूद वन विभाग, नमामि गंगे परियोजना और प्रशासनिक अधिकारी अनजान बने हुए हैं। न तो प्लेज लगाकर की जा रही अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा रही है और न ही गंगा में कचरा डालने वालों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई हो रही है। यह लोग गंगा को प्रदूषित कर लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं।
प्रदूषित हो रही गंगा
हस्तिनापुर क्षेत्र में गंगा नदी लगातार प्रदूषित हो रही है, लेकिन इसे स्वच्छ बनाने के लिए चलाए जा रहे नमामि गंगे अभियान के तहत प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। नदी में अवैध रूप से कचरा, प्लास्टिक, पशु अवशेष और रासायनिक पदार्थ डाले जा रहे हैं, जिससे जल की गुणवत्ता गिरती जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद संबंधित विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं। गंगा प्रदूषण से जलीय जीवों के साथ-साथ धार्मिक आस्था को भी ठेस पहुंच रही है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।
सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा
हस्तिनापुर क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर प्लेज की खेती किए जाने का मामला सामने आया है। नियमों को ताक पर रखकर कब्जाधारक सार्वजनिक जमीन पर खेती कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान के साथ सरकारी संपत्ति पर कब्जा बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों की शिकायतों के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
कराई जाएगी कार्रवाई
अगर क्षेत्र में गंगा को प्रदूषित किया जा रहा है तो यह मामला गंभीर है तुरंत जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। -संतोष कुमार, एसडीएम, मवाना
गंगा में पड़ी मुर्गी फार्म से लाई गई बीट स्रोत संवाद