मुजफ्फरनगर दंगे के बाद लोगों के बीच पहुंचने से चूक गए रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह ने इस बार कोई देरी नहीं की। किसानों के बीच पहुंचे और समर्थन दिया। बीमारी के कारण उन्हें लौटना पड़ा। किसान लॉबी में उनके प्रति सहानभूति की लहर भी चली। सपा और कांग्रेस भी पीछे नहीं रही।
बुधवार को हुई बसपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भी भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोला और सरकार के रवैये को गलत बताया। किसान क्रांति यात्रा में शामिल किसान पुलिस से मुकाबला कर किसी तरह किसान घाट पहुंचे और अब अपने घर लौट गए हैं। लेकिन अब सियासी तीर शुरू हो गए हैं।
विपक्ष भाजपा को कठघरे में खड़ा करने के लिए तमाम सवाल खड़े कर रहा है। लेकिन अब देखने वाली बात यह होगी कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में किसानों की नाराजगी का नतीजा क्या होगा। रालोद को कितना लाभ होगा। इतना तय है कि चुनाव के मुद्दों और चुनाव की रैलियों में किसान क्रांति यात्रा और यूपी बॉर्डर पर पड़ी लाठियों की आवाज भी बार-बार सुनाई देती रहेगी।
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