एमएलसी चुनाव में भाजपा को मेरठ-गाजियाबाद सीट पर तगड़ा झटका लगा है। सोमवार को सपा से भाजपा में शामिल होकर एमएलसी चुनाव का पर्चा भरने वाले वीरेंद्र यादव मंगलवार को दोबारा सपा में शामिल हो गए।
भाजपा ने इसकी भनक लगते ही जिस दूसरे प्रत्याशी पर नजर घुमाई, उसका पर्चा निरस्त हो गया। अब भाजपा की स्थिति दयनीय हो गई है। इस पूरे नाटकीय घटनाक्रम में भाजपा नेता एक-दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं।
मेरठ-गाजियाबाद सीट पर भाजपा को ढूंढे से भी प्रत्याशी नहीं मिल रहा था। चार जनपदों (मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, बागपत) के इस चुनाव क्षेत्र में भाजपा के करीब दस लाख सदस्य हैं। लेकिन यहां एक धनबल वाला प्रत्याशी नहीं मिला। सोमवार को नामांकन का अंतिम दिन था।
ऐसे में अचानक पूर्व में सपा से एमएलसी चुनाव लड़े वीरेंद्र यादव को भाजपा ने सुबह पार्टी ज्वाइन कराई और तुरंत प्रत्याशी घोषित कर पर्चा दाखिल करा दिया।
पार्टी ज्वाइन कराने वालों में क्षेत्रीय संगठन मंत्री प्रद्युम्न कुमार और क्षेत्रीय महामंत्री जयकरण गुप्ता शामिल रहे। इसके बाद विधायक ठा. संगीत सोम, महापौर हरिकांत अहलूवालिया और जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा की मौजूदगी में पर्चा दाखिल कराया गया।
मंगलवार सुबह जिला कार्यालय पर चुनाव संचालन के लिए कोर कमेटी की बैठक थी। जिलाध्यक्ष शिवकुमार राणा, क्षेत्रीय मंत्री सतेंद्र भराला, विमल शर्मा, जितेंद्र वर्मा, नरेश गुर्जर, संदीप प्रधान, संजीव बंसल, रोबिन गुर्जर, अजय त्यागी आदि नेता पहुंचे और चुनाव पर मंथन शुरू हुआ।
इस बीच कई बार वीरेंद्र यादव को फोन मिलाया गया, लेकिन स्विच ऑफ मिला। यही नहीं, उन्हें चुनाव लड़ाने के लिए सामने लाने वाले जिला पंचायत सदस्य विक्की तनेजा का भी फोन बंद मिला।
सुबह लगी दिल्ली दरबार में हाजिरी
एक तरफ जहां भाजपाई रात में निश्चिंत होकर सो रहे थे। वहीं सपा अपना गेम खेल रही थी। वीरेंद्र यादव से रात में ही संपर्क स्थापित हुआ और सुबह उनकी दिल्ली में प्रो. रामगोपाल यादव के दरबार में हाजिरी लगवायी गयी।
पूर्व सांसद सुरेंद्र नागर, जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह और सपा प्रत्याशी राकेश यादव के साथ वीरेंद्र यादव प्रो. रामगोपाल के समक्ष पेश हुए। इसके बाद उनकी मुख्यमंत्री से फोन पर बात करायी गयी। इतना होते ही वीरेंद्र यादव सपा में वापसी कर गए।
लगा दूसरा झटका
वीरेंद्र यादव के गायब होने के बाद भाजपा राहुल कुमार मोदीनगर पर दांव खेलने की तैयारी में थी। लेकिन मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच में राहुल का पर्चा खारिज हो गया।
इस प्रकरण में बड़ा खेल और विश्वासघात हुआ है। पार्टी के विभीषणों की तलाश कर उन पर सख्त कार्रवाई की जायेगी। इतनी बड़ी गलती किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी। लेकिन सपा ने बहुत ही ओछी राजनीति की है। -डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी, प्रदेश अध्यक्ष भाजपा