नोट= गौतमबुद्धनगर, शामली, गाजियाबाद, बागपत, मुजफ्फरनगर समेत अन्य केंद्रों के भी ध्यानार्थ
127 अभ्यर्थी हुए फेल, 47 अनुपस्थित, एसडीएस ग्लोबल में भर्ती कराए गए दो के पैर में फ्रैक्चर
धूप से बचने के लिए सुबह 4:48 पर शुरू हुई प्रक्रिया, 5:59 पर दौड़ और 8:21 मिनट पर संपन्न
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। यूपी पुलिस आरक्षी भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा सोमवार से शुरू हो गई। इसमें 828 अभ्यर्थी दौड़ में शामिल हुए और 47 अनुपस्थित रहे। वहीं, 10 अभ्यर्थियों की हालत बिगड़ गई। इनमें सात अभ्यर्थियों को मोदीपुरम के एसडीएस ग्लोबल अस्पताल और तीन को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। एसडीएस ग्लोबल में भर्ती कराए गए दो अभ्यर्थियों गौतमबुद्ध नगर के प्रिंस और बागपत के सुमित डांगी के पैर में फ्रैक्चर है। हालांकि सभी की हालत खतरे से बाहर बताई गई है।
नोडल अधिकारी एसपी अवनीश कुमार ने बताया कि आरक्षी भर्ती के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा में पहले दिन 875 अभ्यर्थियों को शिरकत करनी थी। इनमें 828 अभ्यर्थी रुड़की रोड स्थित छठी वाहिनी पीएसी परिसर में उपस्थित हुए। तेज धूप से पहले दौड़ पूरी कराने के लिए सुबह 4:48 पर अभ्यर्थियों के प्रवेश व चेकिंग आदि की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। 5:59 पर दौड़ शुरू कराने के बाद चार राउंड 8:21 मिनट पर पूरे करा दिए गए।
अभ्यर्थियों को 25 मिनट में 4.8 किलोमीटर दौड़ लगवाई गई। दौड़ने के दौरान जिस अभ्यर्थी की हालत बिगड़ी उसे पहले परिसर में मौजूद चिकित्सकों के पैनल ने प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद सात को एसडीएस ग्लोबल अस्पताल और तीन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। अधिकांश को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। मंगलवार को अन्य अभ्यर्थी शारीरिक दक्षता परीक्षा में शिरकत करेंगे।
इनकी बिगड़ी हालत
- शामली के अजय, गाजियाबाद के मुकुल, मुजफ्फरनगर के विपुल, मोदीनगर के आकाश, शामली के रितिक शर्मा, गौतमबुद्ध नगर के प्रिंस, बागपत के सुमित डांगी को एसडीएस ग्लोबल अस्पताल में और पल्लवपुरम के रूपेश और सहारनपुर के प्रियांश को मेडिकल में भर्ती कराया गया।
पहले रुका और फिर पूरी कर ली दौड़
शारीरिक दक्षता परीक्षा में दौड़ते हुए छह चक्कर लगाने के बाद एक अभ्यर्थी रुक गया। उसने अधिकारियों से कहा कि वह अब नहीं दौड़ेगा। अधिकारी उसे प्राथमिक उपचार कराने का प्रयास करने लगे तभी वह फिर से दौड़ने लगा। खास बात यह रही कि उसने दौड़ पूरी कर क्वालीफाई भी कर लिया। वहीं, एक अभ्यर्थी हालत बिगड़ने पर अजीब हरकतें करने की जानकारी मिली और चर्चा रही कि उसने नशे का इंजेक्शन लिया है लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। एक अभ्यर्थी के परिजन डिस्चार्ज के दौरान यह कहते भी सुने गए थे कि बिल जब घरवालों को देना है तो उन्हें निजी अस्पताल के बजाय सरकारी में भर्ती कराना चाहिए था।
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