बच्चे के माता-पिता को समझाते अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर में प्रशासनिक अमले ने जिला अस्पताल में शनिवार को ढाई साल के अतिकुपोषित मासूम का जीवन बचाने के लिए अहम भूमिका निभाई। बच्चे को एनआरसी में भर्ती रखने के लिए उसके माता और पिता तैयार नहीं थे। अपनी जिद पर अड़े दंपती को अधिकारियों ने समझाबुझाकर मासूम का उपचार शुरू कराया।
स्वामी कल्याण देव राजकीय जिला चिकित्सालय में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती कर उनका उपचार किया जाता है। पुरकाजी ब्लॉक के गांव बसेड़ा निवासी दंपती गोवर्धन व पुष्पा के ढाई साल के बेटे अजय को कुपोषण के कारण आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नीतू के माध्यम से गुरुवार को पोषण पुनर्वास केंद्र लाया गया था। यहां पर डॉ. आरती नंदनवार ने उसकी जांच की तो बच्चे का वजन मानक से कम पाया गया। उसे एनआरसी में भर्ती कर लिया गया। शुक्रवार को बच्चे के ब्लड की जांच कराई गई तो हिमोग्लोबिन की मात्रा केवल तीन मिलीग्राम पाई गई। शनिवार दोपहर बच्चे को एक यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। ब्लड चढ़ने के बाद माता-पिता बच्चे को ले जाने लगे।
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वहीं एनआरसी स्टॉफ ने उसकी हालत गंभीर बताते हुए कुछ दिन भर्ती रखने के लिए कहा, लेकिन दंपती नहीं माने। इस पर सीएमओ डॉ. पीएस मिश्रा और डीपीओ वाणी वर्मा भी एनआरसी पहुंचे। पुलिस को भी बुला लिया गया। दंपती को काफी समझाया गया, लेकिन वे बच्चे को एनआरसी में भर्ती रखने को तैयार नहीं थे। बाद में सीडीओ महेंद्र प्रसाद भी अस्पताल पहुंच गए। सभी ने मिलकर दंपती को समझाया। पुलिस का भी डर दिखाया गया। आखिरकार घंटों की जद्दोजहद के बाद माता-पिता बच्चे को भर्ती रखने के लिए राजी हुए।
सीएमओ ने बताया कि दंपती कह रहा था कि उनके दूसरे बच्चे को चोट लगी है। इसलिए वे एनआरसी में नहीं रखना चाहते। काफी समझाने के बाद वे मान गए।
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