एसटीएफ ने 8.80 लाख रुपये के साथ बृहस्पतिवार की रात चार आरोपियों को पकड़ा था। शुक्रवार को पुलिस ने चारों आरोपियों पर नरमी बरती। आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में केस दर्ज करने के बजाय उन्हें शांति भंग के आरोप में कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के पास नए नोट कहां से आए इसकी जांच आयकर विभाग करेगा।
पांडव नगर निवासी रजनीश गर्ग, जय देवी नगर निवासी अनिल रावत, कसेरूखेड़ा निवासी जितेंद्र कुमार और मोहनपुरी निवासी वेदप्रकाश के पास से पुलिस और एसटीएफ टीम ने 8.80 लाख रुपये बरामद किए थे। इनके पास मिले नोटों में एक ही सीरीज के दो-दो हजार रुपये के नए नोट शामिल थे। पुलिस की सूचना पर आयकर विभाग के अधिकारियों ने रात में ही चारों से पूछताछ की थी। इंस्पेक्टर सिविल लाइन विजय कुमार सिंह ने बताया कि चारों को शांति भंग के मामले में शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से चारों को जमानत मिल गई।
बडे़ दावे करने वाली पुलिस ढीली पड़ी
बृहस्पतिवार की रात चारों को नई करेंसी के साथ पकड़ने वाली पुलिस बढ़ चढ़कर दावे कर रही थी। पुलिस का कहना था कि ये चारों कमीशन पर नोट बदलने का काम करते हैं। पुलिस ने उन्हें पकड़ा तो किसी बडे़ अधिकारी को नोटों की सप्लाई देने जा रहे थे, लेकिन शुक्रवार को पुलिस बैकफुट पर नजर आई। पुलिस ने चारों का शांति भंग में चालान किया। ऐसे में कोर्ट से जमानत भी मिल गई। पुलिस का कहना है कि पकडे़ गए आरोपी नई करेंसी को अपनी रकम बता रहे थे। करेंसी के मामले में आयकर विभाग ही इसकी जांच करता है। यदि पुलिस को ये बात पता थी कि तो फिर कार्रवाई से पहले आयकर विभाग की टीम को क्यों साथ नहीं लिया? यह एक बड़ा सवाल है।
शक के दायरे में आए बैंक
लाखों रुपये की नई करेंसी पकड़े जाने के मामले सामने आने से कई बैंक भी संदेह के दायरे में हैं। बकौल पुलिस चारो आरोपी बरामद रकम को अपनी बता रहे हैं, लेकिन यह संभव नहीं है। सभी नोटों की एक सीरीज होने का मतलब है कि ये सभी नोट एक ही बैंक से एक साथ निकाले गए हैं। आरोपियों की बात पर विश्वास भी किया जाए तो आरबीआई की गाइड लाइन के अनुसार चारों आरोपी अधिकतम 96 हजार रुपये ही एक साथ निकाल सकते थे।
कचहरी जाने की बात कहकर दुकान से गया था
पकड़ा गया आरोपी रजनीश वर्तमान में एक स्पोर्ट्स शॉप पर सेल्समैन है। दुकानदार के मुताबिक रजनीश बृहस्पतिवार दोपहर करीब डेढ़ बजे कचहरी में कोई काम होने की बात कहकर दुकान से गया था। शाम चार बजे तक भी वह नहीं लौटा तो उसे फोन किया। उसने 15 मिनट में आने की बात कही लेकिन वह शाम तक दुकान पर नहीं आया। शाम करीब सात बजे के आसपास रजनीश के भाई ने दुकान पर आकर बताया कि वह अभी तक घर नहीं पहुंचा है। उसका मोबाइल भी बंद आ रहा है।