मेरठ में एनसीईआरटी की नकली किताबों के मामले में पुलिस की जांच ठंडी पड़ गई है। करोड़ों के इस खेल में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं कि वह चारों नामजद आरोपियों को बचने का पूरा मौका दे रही है।
भाजपा नेता संजीव गुप्ता व उसके भतीजे सचिन गुप्ता एनसीईआरटी की नकली किताबें परतापुर और गजरौला में छाप रहे थे। एसटीएफ ने छापा मारकर करोड़ों रुपये कीमत की नकली किताबें बरामद की थीं। परतापुर पुलिस ने एनसीईआरटी, जीएसटी व अन्य विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। चारों नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी का वारंट भी कोर्ट से लिया हुआ है। इसी दौरान इंस्पेक्टर परतापुर कोरोना पॉजिटिव हो गए और उनकी जांच ठंडी पड़ गई है।
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यही नहीं, पुलिस अधिकारियों ने भी करोड़ों रुपये के इस खेल के प्रति अपना रुख बदल लिया। पुलिस ने पांच दिन से इस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं की है। आरोपियों के खिलाफ न तो कोई सबूत जुटाए गए और न ही गिरफ्तारी के लिए कहीं दबिश दी गई। दूसरी ओर एसपी सिटी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह का कहना है कि पुलिस का आरोपियों पर फोकस है। मामले में कार्रवाई जारी है।
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