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मोस्ट वांटेड बद्दो की फरारी के बाद चुप्पी साधे बैठी रही मेरठ पुलिस, हाईकोर्ट के आदेश पर हुई बड़ी कार्रवाई

Fri, 22 Jan 2021 01:31 PM IST
Dimple Sirohi गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
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बद्दो की कोठी ध्वस्त - फोटो : अमर उजाला
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बदन सिंह बद्दो पर कार्रवाई का श्रेय हाईकोर्ट को जाता है। बद्दो के पुलिस हिरासत से भागने के बाद 19 महीने तक मेरठ पुलिस खामोश बैठी रही। दो माह पहले हाईकोर्ट में उसके खिलाफ जनहित याचिका डाली गई। इसके बाद बद्दो की संपत्ति ढूंढने का काम ट्रेनी आईपीएस कृष्ण बिश्नोई ने किया। एक के बाद एक कार्रवाई करते हुए पुलिस ने बद्दो की कोठी ध्वस्त कराई। 

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28 मार्च 2019 को बदन सिंह बद्दो पुलिस कस्टडी से भाग गया था। उसकी तलाश में पुलिस, एसटीएफ, एटीएस समेत कई सुरक्षा एजेंसियां लगी रहीं। बद्दो पर ढाई लाख रुपये का इनाम भी है। पुलिस ने बद्दो से जुड़े कई लोगों को जेल भी भेजा। लेकिन उस पर 19 महीने तक कोई कार्रवाई नहीं की। हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में बद्दो से कई लोगों को खतरा बताया गया। मेरठ पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए गए। 

हाईकोर्ट ने मामले में प्रमुख सचिव गृह को कोर्ट में पेश होकर जवाब देने के आदेश दिए। इसके बाद बद्दो के खिलाफ मेरठ पुलिस खड़ी हुई। एडीजी मेरठ जोन राजीव सभरवाल और आईजी रेंज प्रवीण कुमार ने उसकी कुंडली खंगाली। ट्रेनी आईपीएस ने पंजाबीपुरा में बद्दो की कोठी तलाश ली। बद्दो ने पुलिस प्रशासन से बचने के लिए यह कोठी भाभी कुलदीप कौर को उपहार में दे दी थी।

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सात नवंबर को हुई थी कुर्की
बद्दो की कोठी पर पहली कार्रवाई सात नवंबर 2020 को हुई। कोर्ट के आदेश पर ब्रह्मपुरी पुलिस ने कुर्की की। उसके बाद बद्दो को माफिया बनाया गया। कोठी को ध्वस्त कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। एमडीए से जांच कराई गई। मामला कमिश्नर की कोर्ट में पहुंचा। बद्दो की भाभी सुनवाई में नक्शा नहीं पेश कर पाईं। इस पर कमिश्नर ने कोठी को अवैध घोषित कर दिया। पुलिस की अगली कार्रवाई गैंगस्टर 14 (ए) के तहत बद्दो की अचल संपत्ति जब्त करने की है। पुलिस प्रक्रिया पूरी कर चुकी है। प्रशासनिक अधिकारी के आदेश का इंतजार है। 

लगन से किया काम
दो महीने में बद्दो को माफिया बनाया गया। उसकी कोठी ढूंढकर कुर्की की कार्रवाई और अब उसको ध्वस्त किया। आईपीएस कृष्ण बिश्नोई ने इसमें लगन से काम किया। एसएसपी मेरठ ने भी प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कार्रवाई सुनिश्चित कराई।  -राजीव सभरवाल, एडीजी मेरठ जोन
 
जोनल अधिकारियों ने बनाया ध्वस्तीकरण प्लान
बद्दो की पंजाबीपुरा में बनी कोठी को ध्वस्त करने के लिए एमडीए का पूरा अमला मौजूद रहा। एमडीए उपाध्यक्ष मृदुल चौधरी ने चारों जोनल अधिकारी और जूनियर इंजीनियरों को मौके पर तैनात करने के निर्देश दिए थे। गुरुवार को मकान का 60 प्रतिशत हिस्सा ध्वस्त कर दिया गया। बचा हिस्सा शुक्रवार को गिरा दिया जाएगा।

जोनल अधिकारी धीरज सिंह ने बताया कि मकान घनी आबादी में होने के कारण जेसीबी चलाने में दिक्कतें आईं। दो जेसीबी से पहले मकान के पिछले हिस्से को गिराया गया। मकान का आगे का हिस्सा संकरी गली में है। उसको तोड़ने के लिए मजदूर लगाए जाएंगे। जोनल अधिकारियों ने तकनीकी तौर पर मकान को ध्वस्त करने का प्लान तैयार किया। पहले उन्होंने बगीचे की तरफ से जेसीबी लगाई।

इसके बाद बद्दो के मकान के बराबर में खाली पड़े प्लॉट की दीवार तोड़कर जेसीबी को अंदर भेजा गया। मकान के बराबर में बने मंदिर को बचाने के लिए घर के ऊपर जाकर मजदूरों ने दीवार तोड़ी। इसके बाद नीचे से दीवारों को तोड़ा गया। इस मौके पर अधीक्षण अभियंता एके सिंह, डिप्टी कलेक्टर मनोज कुमार, विपिन कुमार मौजूद रहे।
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नौकर ले गए लाखों की कीमत का सामान
ध्वस्तीकरण कार्रवाई देखने के लिए मौके पर भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने इस कार्रवाई पर खुशी जताई। उन्होंने पुलिस को बताया कि कोठी में कुर्की की कार्रवाई से पूर्व नौकर-नौकरानी लाखों रुपये का कीमती सामान ले गए। बद्दो को उम्रकैद की सजा होने के बाद से उनको वेतन नहीं मिला था।

बद्दो की फरारी के बाद बेटा सिकंदर भी लापता हो गया। उसके बाद नौकरों को पैसे मिलने की उम्मीद खत्म हो गई। एएसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि बद्दो का पालतू कुत्ता उसकी नौकरानी मायावती के पास है। पुलिस इसकी जांच कर रही है। कोठी से कौन-कौन सा सामान गया है। टीपीनगर और ब्रह्मपुरी पुलिस इसका पता लगा रही है। 
 
शहर में और भी अवैध निर्माण, कब होंगे ध्वस्त
तीन नोटिस और कमिश्नर न्यायालय में सुनवाई के बाद गिराई बद्दो की कोठी
जिस तेजी से बद्दो की अवैध रूप से बनाई गई कोठी पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई, उसी तेजी से अन्य निर्माणों पर एमडीए कार्रवाई करे तो शहर में अवैध निर्माण खत्म हो जाएं। लेकिन विभाग नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेता है। 

बद्दो के निर्माण को तोड़ने के लिए सिर्फ तीन नोटिस जारी किए गए। एमडीए की तरफ से 9 नवंबर को नोटिस देने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके बाद 17 और फिर 24 नवंबर को नोटिस दिया गया। इसके बाद कमिश्नर न्यायालय में इस मामले की सुनवाई की गई। जहां सभी तथ्यों पर कमिश्नर अनीता मेश्राम ने विचार करते हुए बद्दो की कोठी को ध्वस्त करने के आदेश दिए।

ऐसे कई निर्माण एमडीए के सामने आते रहते हैं, लेकिन हाईप्रोफाइल मामला न होने के चलते इनकी फाइलों को बंद कर दिया जाता है। इसके चलते शहर में अवैध निर्माण खड़े हो जाते हैं। इससे पहले वर्ष-2019 में एमडीए की तरफ से बवाल के आरोपी बदर अली के बिजली बंबा बाईपास स्थित निर्माणाधीन अस्पताल को गिराया गया था।

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