शहर में कई ऐसे संगठन है जो आजादी की मशाल लेकर अपने खुद को आगे करने की होड़ में रहते हैं। उन्होंने भी इस दिन को भुला दिया। शहर में स्वतंत्रता संग्राम परिषद से लेकर अन्य देशभक्ति कार्यक्रमों में आगे रहने वाली संस्थाओं के सदस्य भी कहीं नजर नहीं आए। प्रधानमंत्री दो जनवरी 2022 को खेल विवि के शिलान्यास कार्यक्रम के लिए मेरठ आए थे। तब उन्होंने शहीद स्मारक पर 23 मिनट का समय दिया था। उन्होंने मंगल पांडे को नमन करते हुए जो तस्वीर पोस्ट की है वह दो जनवरी को ही ली गई थी।
नहीं होती साफ-सफाई, विभाग भूले जिम्मेदारी
शहीद स्मारक में नए राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में लगाई गई वीथिकाओं का लोकार्पण भी प्रधानमंत्री ने किया था। इसके बाद भी संग्रहालय की साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी कोई विभाग लेने को तैयार नहीं है। संग्रहालय अध्यक्ष ने कई बार कमिश्नर सुरेंद्र सिंह से भी संपर्क किया। उन्होंने तत्काल नगर निगम को सफाई कराने के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए कहा, लेकिन दो दिन सफाई होने के बाद फिर बंद कर दी गई।
मेरठ क्रांति से पूर्व बैरकपुर में शहीद हो गए थे मंगल पांडे
मंगल पांडे का जन्म 19 जुलाई 1827 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगवा गांव में हुआ था। वह 1849 में 22 साल की उम्र में ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल हो गए। मंगल पांडे 34वीं बंगाल नेटिव इंफेंट्री की छठी कंपनी में एक सैनिक थे। मेरठ में क्रांति की शुरूआत 10 मई को हुई थी। इससे पूर्व आठ अप्रैल 1857 को मंगल पांडे को पश्चिमी बंगाल के बैरकपुर के लाट बागान में कोर्ट मार्शल के बाद अंग्रेजों ने फांसी दे दी थी। माना जाता है कि उनकी शहादत के बाद भारतीयों में आक्रोश भड़क गया।