प्रधानमंत्री के नाम पर एक और बड़े फर्जीवाडे़ की तैयारी हो रही है। जनपद में इस समय बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत आवेदन पत्र भरवाये जा रहे हैं। जिसमें प्रत्येक बेटी के लिए दो-दो लाख रुपये देने की बात कही जा रही है। अब तक जनपद में मोटे अनुमान के तौर पर डेढ़ लाख से ज्यादा आवेदन पत्र भरवाये जा चुके हैं। वहीं संबंधित विभाग को ही इस योजना की जानकारी नहीं है।
ये है फर्जीवाड़ा
इन दिनों एक आवेदन पत्र चर्चा में है। जिसमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत 8 वर्ष से 32 वर्ष की बेटियों के लिए दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है। आवेदन पत्र में सभी जानकारियों के साथ आवेदिका का बैंक शाखा का नाम, बैंक खाता संख्या और आईएफएससी कोड आदि की जानकारी के साथ नीचे एक कॉलम पार्षद या प्रधान के लिए दिया गया है। जो आवेदिका के नाम और माता पिता के नाम की संस्तुति करेगा। इस आवेदन पत्र में नीचे कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत की है। 200 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि के साथ यह योजना देशभर में शुरू की गई है। जिसके तहत दो-दो लाख रुपये दिए जाएंगे।
प्रधान और पार्षदों के यहां पहुंच रहे लोग
देहात में प्रधान और नगरीय क्षेत्र में पार्षदों के यहां संस्तुति कराने वाले लगातार पहुंच रहे हैं। बाजार में फोटो स्टेट आदि दुकानों पर यह फार्म दो रुपये से 25 रुपये तक का बिक रहा है और आवेदन पत्र भरने वाले भी पचास से सौ रुपये ले रहे हैं। वहीं कुछ लोग आवेदन पत्र जमा कराने के नाम पर भी अशिक्षित और गरीब लोगों से पचास से सौ रुपये ले रहे हैं। लोग विभागों में जाकर आवेदन पत्र जमा करने को चक्कर लगा रहे हैं।
ऐसी कोई योजना नहीं है
इस मामले में जिला प्रोबेशन अधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि उन्हें ऐसी किसी योजना की कोई जानकारी नहीं है। यह जरूर है कि उनके कार्यालय में भी कुछ आवेदन पत्र जमा कराने के लिए आए हैं। इस मामले में आशुतोष सिंह ने शनिवार को एक अपील भी जारी की है, जिसमें जनता से इस योजना के तहत कोई भी आवेदन न भरने को कहा है।
फर्जीवाड़े के पीछे संगठित गिरोह
इस फर्जीवाड़े के पीछे एक सोची समझी नीति के तहत संगठित गिरोह काम कर रहा है। जिसमें उसने अपना निशाना देहात के साथ ही शहर के उस पिछड़े इलाके को बनाया है, जिसमें लोग अशिक्षित होने के साथ ही गरीब भी हैं। इस गिरोह का पहला काम इस योजना का झूठा प्रचार कर आवेदन पत्र वितरित कराकर उसे भरवाने का चल रहा है। इसके साथ ही अब फार्म जमा कराने के नाम पर भी ये लोग छोटे स्तर पर ठगी करते हुए पचास से सौ रुपये तक वसूल रहे हैं। लेकिन असली ठगी का काम इसके बाद शुरू होगा, जिसमें ये लोग अनुदान स्वीकृत कराने के नाम पर पांच से दस हजार रुपये की वसूली आवेदन पत्र जमा कराने वालों से करेंगे।
प्रधानमंत्री और भाजपा को बदनाम करने की साजिश
इस मामले में सांसद राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि यह भाजपा और प्रधानमंत्री को बदनाम करने की साजिश है। जब इतनी बड़ी संख्या में फार्म भरे जाएंगे और उनका कोई परिणाम सामने नहीं आयेगा तो निश्चित रूप से जनता के बीच रोष और अविश्वास पैदा होगा। इस मामले में जिला प्रशासन को गहनता से जांच कराने के साथ इस फर्जीवाड़े को करने वालों को चिह्नित करते हुए कार्रवाई तय करनी चाहिए।
पहले आवासीय योजना में हो चुका है घोटाला
प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर लोगों के साथ धोखा किया जा रहा है। लोग साइबर कैफे पर लाइनों में लगे हैं। यहां उनसे आवेदन के नाम पर धन की उगाही की जा रही है। जबकि, इस योजना में आवेदन की अंतिम तिथि 15 नवंबर थी, जिसे गुजरे एक माह से भी ज्यादा का समय हो गया है। यही नहीं, सूबे में इस योजना के तहत मकान के लिए करीब 16 लाख लोगों ने आवेदन किया था। इनमें से करीब 10 लाख लोगों को ही पात्र पाया गया है। इसके लिए पहले चरण की डीपीआर भी तैयार कर ली गई है। बावजूद इसके अभी भी लोग इस योजना में आवेदन कर रहे हैं। इस संबंध में अमर उजाला ने 22 दिसंबर के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था।