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व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह! मौत बीमारी से और पोस्टमार्टम का दवाब

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मेरठ। कोरोना काल में पोस्टमार्टम हाउस में शवों की दुर्दशा हो रही है। नियमानुसार इस समय मौत होने पर कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद ही परिजनों को शव सौंपा जाता है। इस प्रक्रिया में कई बार अधिक समय लग जाता है।
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बिहार निवासी नसीम मेरठ स्थित फैक्टरी में काम करता था। वह करीब एक माह से बीमार था। इसका निजी अस्पताल में उपचार कराया। उसे बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज भेज दिया। यह चलकर मेडिकल कॉलेज पहुंचा। उसे ऐसे वार्ड में भेज दिया गया जहां मानसिक तनाव के चलते उसकी मौत हो गई। कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट टेस्ट आने से पहले शव देने से इनकार कर दिया। किठौर निवासी 6 साल की एक बच्ची की मौत का मामला भी कुछ ऐसा ही है। बच्ची छत से गिरकर घायल हुई थी। बृहस्पतिवार रात इलाज के दौरान बच्ची की मौत हो गई। डॉक्टरों ने पहले कोरोना टेस्ट कराने की बात कही। रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया। एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह का कहना है कि नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। सीएमओ डॉक्टर राजकुमार का कहना है कि नियमानुसार इस समय जो भी मौत हो रही है, कोरोना संक्रमण टेस्ट कराया जा रहा है। कोरोना की रिपोर्ट नेगेटिव आने पर शव परिजनों को सौंप दिया जाता है। यदि रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो प्रशासन की देखरेख में पोस्टमार्टम न कराकर अंतिम संस्कार कराया जाता है। बीमारी से मरने पर पोस्टमार्टम नहीं कराया जा रहा।
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