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स्पोर्ट्स स्टेडियम में बिना कोच अभ्यास कर रहे खिलाड़ी

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मेरठ। प्रदेश और केंद्र सरकार एक ओर खेलों को बढ़ावा देने के दावे कर रही है तो दूसरी ओर अभी तक कई स्पोर्ट्स स्टेडियम में खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाएं तक मुहैया नहीं हो पा रही हैं। यहां कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में तो चार खेलों में कोच तक नहीं हैं। कबड्डी, बास्केटबाल, बैडमिंटन और बॉक्सिंग जैसे महत्वपूर्ण खेलों में प्रशिक्षक न होने से खिलाड़ी परेशान हैं। इन हालात में प्रशिक्षण लेेने वालों की संख्या भी लगातार कम हो रही है।
एथलेटिक्स को छोड़ दें तो यहां से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने वाले खिलाड़ियों की संख्या काफी कम है। एथलेटिक्स में यहां से पारुल चौधरी, अन्नू रानी, प्रियंका गोस्वामी, सीमा अंतिल, किरन बालियान समेत कई खिलाड़ी देशभर में मेरठ का नाम रोशन कर चुके हैं। इसके बावजूद यहां कई खेलों में कोच तक उपलब्ध नहीं हैं।
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दुनियाभर में हो रही कबड्डी लीग, यहां कोच का इंतजार
दुनियाभर में कबड्डी को बढ़ावा देने के लिए विशेष लीग कराई जा रही हैं, मगर यहां स्टेडियम में कबड्डी के लिए अभी तक कोच की व्यवस्था नहीं है। यहां दस से अधिक बच्चे कबड्डी का अभ्यास करने आते हैं। जब भी कोई राज्य स्तरीय प्रतियोगिता किए जाने की बात होती है तो बाहर से कबड्डी एसोसिएशन के लोगों को बुलाकर बच्चों का चयन किया जाता है। यहां कोच न होने के कारण बच्चों की संख्या तक नहीं बढ़ रही है। जबकि इस खेल में लड़कियां भी बढ़ चढ़कर भाग ले रही हैं।
बैडमिंटन, बास्केटबाल और बॉक्सिंग का बुरा हाल
कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में बॉक्सिंग में 15 से अधिक खिलाड़ी अभ्यास करने आते हैं। बैडमिंटन में भी 50 से अधिक बच्चे यहां अभ्यास करते हैं। बैडमिंटन के लिए तो यहां एक बड़ा कोर्ट भी बना है, लेकिन कोच न होने के कारण खिलाड़ी अभ्यास नहीं कर पाते हैं। बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए भी वह तैयार नहीं हो पाते हैं। यही हाल बास्केटबाल का है। बास्केटबाल में भी 50 से अधिक खिलाड़ी यहां पंजीकृत हैं। इसके बावजूद यहां अभी तक कोच उपलब्ध नहीं है। कई बार खिलाड़ियों ने अपनी समस्याओं के बारे में खेल कार्यालय को अवगत कराया, लेकिन समस्याओं का समाधान ही नहीं हो पाया।
तीरंदाजी में भी कई साल बाद मिला कोच
तीरंदाजी में यहां 15 बच्चे पंजीकृत हैं। अभी बीते मार्च में ही यहां तीरंदाजी कोच की व्यवस्था हो पाई है। इससे पहले यहां तीरंदाजी में कोई कोच नहीं था। अब कोच है तो बच्चों के पास निशाना लगाने को टारगेट नहीं हैं।
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वर्जन -
स्पोर्ट्स स्टेडियम में बैडमिंटन, बास्केटबाल समेत जिन खेलों में भी कोच नहीं है, उनके बारे में खेल निदेशालय को अवगत करा दिया गया है। इस संबंध में मांग भी की गई है। - अब्दुल अहद, उप क्रीड़ा अधिकारी, क्षेत्रीय खेल कार्यालय मेरठ।
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