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रोग मुक्ति के लिए पितृपक्ष में रोपें तुलसी के पौधे

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रोग मुक्ति के लिए पितृपक्ष में रोपें तुलसी के पौधे
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मेरठ। पितरों के प्रति श्रद्धा भावना रखते हुए आश्विन कृष्ण पक्ष में पितृ तर्पण एवं श्राद्ध कर्म करना आवश्यक होता है। इससे स्वास्थ्य, समृद्धि, आयु, सुख-शांति, वंशवृद्धि एवं उत्तम संतान की प्राप्ति होती है। श्रद्धापूर्वक कर्म करने के कारण ही इस पक्ष का नाम श्राद्ध पक्ष है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध पक्ष में पितरों का पृथ्वी पर आगमन होता है। नियमानुसार पितृ वंशज ही तर्पण दे सकता है। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया इस बार पितृपक्ष मंगलवार एक सितंबर से शुरू हो रहे हैं। इस दिन अनंत चतुर्दशी व्रत भी रहेगा। पितृपक्ष में सूर्य देव का कन्या राशि में प्रवेश शुभ फलदायक माना जाता है। सूर्य देव बुधवार 16 सितंबर को सिंह राशि से निकलकर शाम 7 बजे कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। तुलसी मुक्ति की कारक हैं, साथ ही श्री हरी प्रिय हैं। पितरों की सद्गति, शांति एवं अपनी रोग मुक्ति के लिए पितृपक्ष में बृहस्पतिवार या शुक्रवार के दिन तुलसी का पौधा अपने घर, मंदिर या किसी भी तीर्थ क्षेत्र में रोप करके धर्म लाभ ले सकते हैं।
समृद्धि देने वाले हैं पितृ पक्ष
पितृ विसर्जन आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन बृहस्पतिवार 17 सितंबर को होगा। इन दिनों में कई महत्वपूर्ण योग में वंशज पितरों का तर्पण कर सुख और समृद्धि को प्राप्त करेंगे। अष्टमी के श्राद्ध के दिन श्री महालक्ष्मी व्रत बृहस्पतिवार 10 सितंबर को शुभ योग के साथ होगा। रविवार 13 सितंबर को इंदिरा एकादशी का श्राद्ध भी एक विशेष योग के साथ होगा। इस दिन देव गुरु बृहस्पति मार्गी हो रहे हैं। शास्त्रों के अनुसार, पितरों को श्रद्धापूर्वक याद करने से समृद्धि आती है।
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चंद्र दर्शन कर करें पितरों का आह्वान
पूर्णिमा का श्राद्ध मंगलवार सुबह 9:40 से आरंभ होगा। नित्य कर्म पूजा स्नान से निवृत्त होने के बाद मध्याह्न समय पितरों का तर्पण किया जा सकता है। मंगलवार शाम चंद्रोदय 6:33 बजे है। रात करीब 9:15 बजे चंद्र दर्शन कर श्रद्धापूर्वक आवाह्न करें।
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