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प्लेटलेट्स के खेल में पिस रहे मरीज

Wed, 21 Sep 2016 01:55 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 डेंगू और चिकनगुनिया के साथ ही सामान्य वायरल बुखार में प्लेटलेट्स गिर रही है। ऐसे में मरीजों को हफ्तों तक अस्पताल में गुजारने पड़ रहे हैं। क्योंकि प्लेटलेट्स काफी नीचे बनी हैं। जिस कारण से चिकित्सक की सलाह पर मरीज भर्ती है। लेकिन ऐसी स्थिति में थोड़ा सजग हो जाने की जरूरत है। खासकर प्लेटलेट्स के मामले में, क्योंकि कुछ लैब प्लेटलेट्स काउंट में हेराफेरी कर रही हैं जिसको लेकर स्वास्थ्य विभाग सख्त एक्शन लेने की तैयारी में है। वहीं, सभी लैब संचालकों को हिदायत दी गई है कि संजीदगी के साथ रिपोर्ट दी जाये। ताकि किसी मरीज को बिना मतलब परेशान ना होने पड़े। जरूरत ना होते भी मरीज को अस्पताल में भर्ती ना रखा जाए।
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 हापुड़ रोड स्थित कुछ अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें मिली है कि जिस लैब पर उनके द्वारा ब्लड सैंपल की जांच रिपोर्ट कराई गई, उसने प्लेटलेट्स काउंट गलत दिया। मामला लिसाड़ी गेट से जुड़े एक मरीज का है जो हापुड़ रोड के अस्पताल में भर्ती था। जिसका प्लेटलेट्स काउंट तीन दिन तक भर्ती रहने पर 50 हजार से नीचे रहा। इसके बाद परिजनों ने सैंपल की जांच बाहर से कराई तो प्लेटलेट्स काउंट सवा लाख से ऊपर आई। इसके बाद परिजनों ने अपने मरीज को डिस्चार्ज कराकर कराकर दूसरे अस्पताल में भर्ती करा दिया। वहां पर जब जांच कराई गई तो प्लेटलेट्स काउंट एक लाख से पार था। जिसके बाद अस्पताल ने मरीज को कुछ ही देर में डिस्चार्ज कर घर पर ही उपचार लेने की सलाह दी।   

मोटे मुनाफे का कारोबार
वायरल बुखार के बीच प्लेटलेट्स का यह खेल मोटे मुनाफे से जुड़ा है। दरअसल इस तरह की हेराफेरी करने लैब के साथ ही अस्पताल और चिकित्सक को भी दोहरा फायदा होता है। क्योंकि लैब को हर दिन जांच के लिए सैंपल मिलता है तो डॉक्टर की हर दिन विजिट होती है। इन सब के बीच मरीज के लंबे समय तक भर्ती रहने से दवा से लेकर हॉस्पिटल चार्ज का मीटर भी बढ़ता रहता है। कुछ लैब व हॉस्पिटल इस तरह का खेल करते हैं, क्योंकि वे इसे कमाई का सीजन मानते हैं। जिनके वजह से बाकी की छवि पर भी असर पड़ता है।
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थोड़ा संभलने की जरूरत
ऐसी स्थिति में जब वायरल फैला हो तो उसमें जरूरी है कि बड़ी लैब से जांच कराये। अगर रिपोर्ट में ज्यादा प्लेटलेट्स की गिरावट आती है तो फिर उसकी क्रॉस चेकिंग के लिए दोबारा से किसी दूसरी लैब पर जांच करा लें। ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की हेराफेरी होने की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
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