पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गंगा का जलस्तर और ज्यादा बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बढ़े जलस्तर के कारण आस पास के गांवों में रहने वाले लोगों का से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। विभिन्न इलाकों के कई गांव चारों ओर पानी से घिर गए हैं। कहीं सड़कें टूट गई हैं तो कहीं आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। आगे तस्वीरों में देखें पानी का भयावह रूप :-
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जलमग्न हुए गांव
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जलीलपुर बिजनौर में रायपुर खादर जाने वाली सड़क पर गंगा का पानी आने के कारण आवाजाही बाधित है। किसानों के सामने पशुओं के लिए चारा का प्रबंध करना सबसे बड़ी समस्या बन गई है। जलीलपुर के गांव सलेमपुर, मीरापुर सीकरी, रायपुर खादर, जलालपुर, नारनौर, दत्तियाना, मुजफ्फरपुर खादर, सुजातपुर खादर, स्याली, जमालुदीनपुर, नेवला आदि के जंगल में खड़ी किसानों की हजारों बीघा फसल करीब एक माह से जलमग्न है।
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सोमवार को गंगा से उफन कर आ रहा पानी का जलस्तर और अधिक हो जाने के कारण गांव रायपुर खादर, दत्तियाना, मुजफ्फरपुर खादर, सुजातपुर खादर, स्याली, नेवला, सीकरी के हालात टापू जैसे हो गए हैं। बाढ़ जैसे हालत पैदा हो गए है। प्रशासन तटीय क्षेत्र में गांव में अलर्ट जारी कर रखा है। इन गांवों के चारों ओर कई फुट पानी बह रहा है। नारनौर से दत्तियाना के बीच और रायपुर खादर से अजदेव जाने वाली एक मात्र मुख्य सड़क पर पानी अधिक होने के कारण का संचालन भी बंद हो गया है।
बारिश से गांव में जलभराव
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कासमपुरगढ़ी गांव में बारिश से कई मोहल्लों में जभराव की स्थिति हो गई। मोहल्ला पधानवाला में घरों में पानी घुस गया। गांव के संजय, संदीप, सदरु कहना है कि घरों तक पानी घुस आया। इंटर कॉलेज मार्ग पर पानी जमा होने से छात्र-छात्राओं को परेशानी उठानी पड़ी। रास्तों पर पानी भरने से गांववासियों को दैनिक कार्यों में परेशानी उठानी पड़ी। ग्राम प्रधान हाजी हामिद हसन का कहना है बरसात के चलते नालों की सफाई में दिक्कत आ रही है, पानी उतरते ही सफाई होगी।
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राहत शिविर में पसंद नहीं है रहना
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बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों को राहत शिविर में रहना कभी पसंद नहीं रहा है। ग्रामीण जान जोखिम में डालकर अपने गांव में ही रहना पसंद करते हैं। खानपुर खादर में बने बाढ़ राहत शिविर में बहुत कम ग्रामीणों ने शरण ली है। एसडीएम चांदपुर उमेश कुमार मिश्रा ने बताया बाढ़ राहत के लिए प्रशासन की पूरी तैयारी है। ग्रामीण राहत शिविर में आने को तैयार नहीं है। प्रशासन ने पशुओं का चारा व ग्रामीणों के रहने खाना आदि की पूर्ण व्यवस्था की हुई है। जिस गांव को नाव की जरूरत होगी, उसके लिए नाव की व्यवस्था की जाएगी।
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रामगंगा में जल बढ़ा, खादर में बस कई गांव टापू में तब्दील
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स्योहारा में तीन दिन से लगातार हो रही वर्षा से रामगंगा के खादर में बसे गांव टापू बन गए हैं। गांवों का आसपास के सभी जगह से संपर्क टूट गया है। स्योहारा से छह किमी दूर मुरादाबाद जनपद के गांव दरियापुर, रफायतपुर लगातार हो रही बारिश तथा डैम से पानी छोड़े जाने के कारण टापू बन गए हैं। इन गांव का संपर्क स्योहारा, कांठ, ठाकुरद्वारा आदि से पूरी तरह कट गया है।
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मालन नदी से मंडराया खतरा
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नजीबाबाद में मालन नदी के उफान से बीरूवाला फार्म, उसके आसपास के क्षेत्र प्रभावित हैं। जल निगम की टंकी और बीरूवाला फार्म हाउस की कोठी को खतरा उत्पन्न हो गया है। बड़ी संख्या में आम के पेड़ नदी के उफान में धराशाई हो गए। मालन नदी का कहर अब बीरूवाला गांव और बीरूवाला फार्म को प्रभावित कर रहा है। रविवार रात से नदी के उफान और कटान से बीरूवाला फार्म क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है। एक दर्जन से अधिक आम के वृक्ष मालन नदी का कहर लील चुका है।
नेशनल हाईवे बचाने के लिए अभियान जारी
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नजीबाबाद में सूखरो नदी पर बने पुल से जुड़े हाईवे को बचाने के लिए नेशनल हाईवे लोनिवि की ओर से नजीबाबाद-कोटद्वार नेशनल हाईवे को बचाने के लिए रेत की बोरियां लगाने का अभियान जारी है। सूखरो नदी के उफान से उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाले प्रमुख हाईवे की एक ओर की साइड नदी से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। लगभग आधे हाईवे को नुकसान पहुंच चुका है। हाईवे को बचाने में लगे 19 मजदूर रविवार की तड़के नदी के उफान में फंस गए थे। एसडीएम डॉ. पंकज कुमार वर्मा, सीओ अरुण कुमार सिंह, थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह धामा ने स्वयं रेस्क्यू टीम के साथ नदी में उतरकर सूखरो नदी के बीच फंसे मजदूरों को रस्सियों के सहारे बाहर निकलवाया था।
पहाड़ी क्षेत्रों में मूसलाधार बरसात के कारण क्षेत्र में गंगा नदी उफान पर है। वहीं, तटबंध टूटने के कारण खादर क्षेत्र के कई जगहों पर बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। कई गांवों से लोगों का संपर्क मार्ग कट गया है। गांव में जाने में ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, एक दूसरे से मदद भी ली जा रही है।
गंगा नदी में उफान के चलते वाहनों का आवागमन बंद हो गया है। हालांकि पैदल यात्री अभी जान जोखिम में डालकर अपने डेरों और गांवों की तरफ जा रहे हैं। कई गांवों में रविवार देर शाम तक पानी पहुंच गया। पहाड़ी क्षेत्रों में बरसात के कारण दो दिन से गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। रविवार को गंगा का जलस्तर 1.85 लाख क्यूसेक पहुंच गया। वहीं, सोमवार को गंगा का जलस्तर 1.50 हजार क्यूसेक चल रहा है। मूसलाधार बारिश के कारण गंगा नदी उफान पर हैं। सिरजेपुर मार्ग, हरिपुर मार्ग, दबखेड़ी मार्ग पर तीन से चार फिट पानी भर जाने के कारण आवागमन बाधित है। वहीं, दूसरी तरफ सोती नदी ने भी अपना रास्ता बदलकर गांव की तरफ हो गया है।