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पेट में मृत बच्चे को लेकर सात घंटे तक तड़पती रही महिला, नहीं मिला इलाज

Wed, 18 Jan 2017 01:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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उस वक्त किसी के दिल पर क्या बीती होगी, जब गर्भ में पल रहे बच्चे की जान चली गई हो और खुद की जान खतरे में हो। ऊपर से खुले में चौराहे पर प्रसव हो जाए। लावड़ निवासी 32 वर्षीय महिला मंगलवार को प्रसव पीड़ा में सात घंटे तक तड़पती रही। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सीएचसी, जिला महिला चिकित्सालय से लेकर मेडिकल कॉलेज में इलाज नहीं मिला। मेडिकल में चिकित्सकों ने भर्ती करने से इंकार किया तो परिजन उसे लेकर चल दिए। ऐसे में करीब सात घंटे की पीड़ा के बाद महिला को शाम करीब 4 बजे मेडिकल कालेज में खुले में प्रसव हो गया। उसके बाद हंगामा हुआ और मामले ने तूल पकड़ा तो आनन फानन में महिला को भर्ती कर लिया गया।
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महिला के देवर कामिल उर्फ भूरा की जुबानी महिला की पीड़ा सुनेंगे तो आपका कलेजा भी कांप जाएगा। लेकिन मेडिकल कॉलेज में बैठे चिकित्सकों की दिल नहीं पसीजा। कामिल का कहना है कि उसकी भाभी को सुबह नौ बजे प्रसव पीड़ा हुई थी। वे उसे लावड़ पीएचसी पर लेकर पहुंचे तो उन्होंने दौराला सीएचसी रेफर कर दिया। 108 एंबुलेंस पर फोन किया तो एंबुलेंस नहीं आयी। ऐसे में किराये के वाहन से सीएचसी पर पहुंचे। लेकिन वहां से जिला महिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। वहां पर करीब 2 घंटे तक इंतजार करने के बाद एंबुलेंस पहुंची जिसके बाद जिला महिला चिकित्सालय पहुंचे।
वहां पर चिकित्सकों ने देखते ही कहा कि इनकी हालत गंभीर है और इन्हें वेंटिलेटर पर लेना पड़ सकता है। क्योंकि महिला में खून की कमी है इसलिए मेडिकल कॉलेज में ले जाओ। वहीं पर कंप्लीट ट्रीटमेंट मिल सकता है। ऐसे में हमने जिला अस्पताल में एंबुलेंस मांगी तो उन्होंने 108 पर बात कराई। लेकिन काफी देर इंतजार करने के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। ऐसे में किराये का वाहन करके मेडिकल कॉलेज पहुंचे।
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मेडिकल में भर्ती करने से किया इंकार
कामिल का कहना है कि जिस वक्त मेडिकल कॉलेज में पहुंचे तो दोपहर के करीब 2:30 बजे थे। हम लोग जिला महिला अस्पताल से दी गई रेफर रसीद लेकर डॉक्टर से मिले, तो उन्होंने कहा कि कागज में लिखा है कि बच्चे की पेट में ही मौत हो चुकी है। अभी हमारे पास आईसीयू में बेड खाली नहीं है। प्रसव कराने की स्थिति में मरीज की जान भी जा सकती है। इसलिए आप कहीं बाहर ले जाएं। जिस पर हमने अनुरोध किया कि मरीज अच्छे से चल फिर रही है। कम से कम आप लोग देख तो लीजिये। जिस पर डॉक्टरों ने कहा कि आप मरीज को लेकर आएं। ऐसे में बाहर गाड़ी से उतारकर मरीज को लेकर पहुंचे तो चिकित्सक ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। चिकित्सक ने कहा कि हम रिस्क नहीं ले सकते हैं क्योंकि कंडीशन काफी खराब है और तत्काल ले जाओ।

आशा ज्योति केंद्र के सामने प्रसव
हताश और मायूस परिजन अपने मरीज को लेकर चल दिए। जैसे ही पीछे के दरवाजे से गायनी वार्ड से बाहर निकल कर चले तो कुछ दूर जाने से महिला दर्द के मारे चिल्ला उठी। आशा ज्योति केंद्र के सामने करीब शाम 4 बजे महिला की हिम्मत जवाब दे चुकी थी और चलते हुए गिर पड़ी। उसे बीच सड़क पर खुले में प्रसव हो गया। आशा ज्योति केंद्र के स्टाफ का कहना है कि जिस वक्त परिजन हमारे केंद्र के सामने उसे गाड़ी में बैठा रहे थे, तो अचानक से चिल्लाने की आवाज आई। उसके बाद हम पहुंचे तो केंद्र के सामने ही प्रसव हो गया। हालांकि बाद में हम लोगों ने दोबारा से गायनी वार्ड में जाकर महिला को भर्ती कराया। लेकिन पहले उसे डॉक्यूमेंट्स देखकर भर्ती करने से इंकार कर दिया था।
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