नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही के कारण छह माह पहले धनराशि मिलने के बाद भी सूरजकुंड पार्क में फूड प्लाजा का निर्माण नहीं कराया गया। अब अधिकारी चुनाव आचार संहिता का राग अलाप रहे हैं। इससे साफ है कि फूड प्लाजा अगले वित्तीय वर्ष में ही बन पाएगा।
सूरजकुंड पार्क को एमडीए ने विकसित किया था, लेकिन देखरेख के लिए पार्क नगर निगम को सौंप दिया था। चौराहे पर चल रहे फूड के अवैध कारोबार और जाम को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने पार्क में फूड प्लाजा बनाने का प्रस्ताव कमिश्नर की अध्यक्षता में होने वाली अवस्थापना की बैठक में रखा था। छह माह पूर्व नगर निगम प्रशासन ने पार्क में मुख्य द्वार के निकट फूड प्लाजा बनाने के लिए अवस्थापना निधि से मिले 25 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी। निगम अधिकारियों की उदासीनता के कारण निर्माण शुरू नहीं हो सका। इसका मुख्य उद्देश्य पार्क में आने वाले लोगों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ आम जनता को एक ही स्थान पर अनेकों व्यंजन उपलब्ध कराना था। आचार संहिता लगने से एक सप्ताह पहले ही टेेंडर निकाले गए। टेंडर तो छूट गया, लेकिन आचार संहिता में निर्माण कार्य शुरू नहीं किया जा सकता है। जबकि निगम अधिकारी समय रहते ध्यान देते तो आचार संहिता से पहले निर्माण शुरू हो जाता।
फूड प्लाजा में मिलेंगी सुविधाएं
फूड प्लाजा में व्यंजन खाने वालों को जहां बैठने का सुरक्षित स्थान, वाहन पार्किंग की सुविधा मिलेगी वहीं, स्वच्छ पानी, लाइट, शौचालय की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी।
नगर निगम है गंभीर
पार्क में फूड प्लाजा के लिए अवस्थापना निधि से प्रस्ताव पास है। जिसको टेंडर हो चुके हैं। आचार संहिता खत्म होने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। इसे लेकर नगर निगम बेहद गंभीर है। -रामवृक्ष, अवर अभियंता नगर निगम।
ताकि जनता को मिल सके लाभ
- हमने पार्क में फूड प्लाजा बनवाने का प्रस्ताव रखा था। ताकि पार्क में घूमने वाली जनता ही नहीं बल्कि अन्य लोगों को भी इसका लाभ मिल सके। -हरिकांत अहलुवालिया, महापौर।