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40 वर्ष से नहीं हुई स्थायी नियुक्ति, 5600 के मुकाबले सिर्फ 754 सफाईकर्मी

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40 वर्ष से नहीं हुई स्थायी नियुक्ति, 5600 के मुकाबले सिर्फ 754 सफाईकर्मी
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मेरठ। नगर निगम में वर्ष 1981-82 के बाद सफाई कर्मियों की स्थायी नियुक्ति बंद हो गई। इसके बादइ 1998 में ठेका व्यवस्था लागू हुई। करीब 20 लाख की आबादी वाले शहर में मानक के अनुसार 5600 सफाईकर्मी होने चाहिए पर तैनात सिर्फ 754 ही हैं।
मानक के अनुसार प्रति दस हजार आबादी पर 28 सफाईकर्मी होने चाहिए। शहर की आबादी करीब 20 लाख है। इस हिसाब से यहां कम से कम 5600 सफाईकर्मी होने चाहिए। नगर निगम में आउट सोर्सिंग पर 2415 सफाईकर्मी हैं। यानी आउटसोर्सिंग पर 2431 सफाईकर्मियों की कमी हे। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग भारत सरकार के पूर्व सदस्य व उत्तर प्रदेशीय सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष दुर्गेश वाल्मीकि, राष्ट्रीय वाल्मीकि क्रान्तिकारी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवत प्रसाद मकवाना, महर्षि वाल्मीकि सेना के संस्थापक अध्यक्ष रहे राम चन्द्र वाल्मीकि , विजेन्द्र महरोल ने इन सभी मांगों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी पर समाधान नहीं हुआ।
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ठेका प्रथा हो खत्म
जनसंख्या के अनुपात में सफाई कर्मचारियों की भर्ती होनी चाहिए। ठेकेदारी प्रथा को खत्म कर स्थायी नियुक्ति की जाए। समान कार्य का समान वेतन दिया जाए। सफाई कार्य के पदों पर केवल वाल्मीकि समाज को ही रखा जाए। विनेश विधार्थी , प्रदेश मंत्री उतर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ नगर निगम मेरठ।
हमारी भी सुनें नेता
2005 के बाद से मृतक आश्रित कर्मचारियों की बंद की गई पेंशन और पीएफ सुविधा को फिर से शुरू किया जाए। संविदा को बहाल किया जाए। सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के स्थान पर नए कर्मचारियों की भर्ती की जाए। राजनीतिक दल हमारे मुद्दे भी अपने एजेंडे में शामिल करें। आलोक शर्मा, महामंत्री,कर्मचारी संघ नगर निगम।
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सभी विभागों में हों नियुक्तियां
नगर निगम में जलमल, स्ट्रीट लाइट, निर्माण, हाउस टैक्स समेत सभी विभागों में कर्मचारियों की कमी है। जलमल और स्ट्रीट लाइट विभाग के कर्मचारियों की भी संविदा बहाल की जाए। जो जिस पद पर काम कर रहा है उसको उसी पद के अनुरूप वेतन दिया जाए। सतेन्द्र शर्मा, अध्यक्ष जलमल कर्मचारी एसो.।
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