मेडिकल कॉलेज में मौत से रूबरू हो रहे लोग
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में भर्ती हर दूसरा मरीज अपने तीमारदारों को फोन कर कहता है कि मुझे बचा लो, यहां से बाहर निकालो। न यहां खाना मिलता है और न ही दवाई दी जा रही हैं। हफ्तों से मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में सफाई नहीं हुई। दुर्गंध और गंदगी के बीच इमरजेंसी में मौजूद लगभग 55 मरीजों का रोजाना मौत से साक्षात्कार हो रहा है।
कोरोना महामारी के बीच मरीजों को बचाने के लिए किए गए सभी दावे हवाई साबित हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज मेें न बेड हैं और न ही मरीजों को ऑक्सीजन मिल पा रही है। सीएमओ से लेकर नोडल अधिकारियों के मोबाइल फोन नहीं उठते। अस्पताल में जाने वाले हर तीसरे आदमी की मौत की सूचना आ रही है। तीमारदार सुबह से रात तक अपने मरीज के लिए सिलिंडर की व्यवस्था करने में जुटे हैं। दवा तो दूर मेडिकल कॉलेज में अब भूख से भी शुगर के मरीजों की मौत हो रही है।
कोविड अस्पतालों में भी आक्सीजन की सीमित सप्लाई हो रही है। मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को छोड़ अन्य सभी मरीजों को खुद के लिए आक्सीजन की व्यवस्था करनी पड़ रही है। इमरजेंसी में ट्रेनिंग पर आए डॉक्टरों और दो स्टाफ नर्स पर लगभग 55 मरीजों की जिम्मेदारी है। मरीज बेड पर पड़े करहाते रहते हैं। तीमारदारों को मरीज का शव 24 घंटे बाद मिल रहा है।
केस 1:
मृत्यु के बाद आई पॉजिटिव रिपोर्ट
परतापुर निवासी सरिता हार्ट पेशेंट बताई गई। महिला का सोमवार को आक्सीजन लेवल गिर गया। कई अस्पतालों में प्रयास के बाद गंभीर अवस्था में उसे पवन गुर्जर ने मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। महिला के लिए आक्सीजन की व्यवस्था की गई। पवन गुर्जर ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में उसे कोविड तो दूर अन्य दवाएं भी उपलब्ध नहीं हुई। इस बीच उसकी मौत हो गई। मृत्यु के दो दिन बाद कोविड पॉजिटिव की रिपोर्ट आई।
केस 2:
तीमारदार को नहीं देते कुछ भी जानकारी
ब्रह्मपुरी निवासी प्रतीक सेठी ने बताया कि मरीज को क्या इलाज दिया जा रहा है, इसकी कोई जानकारी नहीं दी जाती है। ब्रह्मपुरी निवासी अमित मरीज दो दिन से भूखे रहेे हैं। खाना भी मरीज तक नहीं पहुंच पाता है। फोन पर मरीज की तड़पने की आवाज सुनते रहे। वह कराह कर डॉक्टर-डॉक्टर चिल्लाता रहा, लेकिन डाक्टर ने उसकी एक न सुनी। छह घंटे तड़पने के बाद उसकी मौत हो गई।
केस 3:
जीवित नहीं लौट रहे मरीज
ट्रांसपोर्ट व्यापारी सुभाष चंद्र ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से कोई भी मरीज जीवित नहीं लौट रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में उनकी रिश्तेदार वंदना रानी को भर्ती किया। आक्सीजन की स्वयं व्यवस्था में लगे रहे। कुछ मेडिकल कॉलेज में जरूरत पूरी करने के लिए मौजूद थे। कोविड टेस्ट हुआ, लेकिन उसकी मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई।
छत टपक रही, हर तरफ गंदगी
मेरठ। मेडिकल कॉलेज में हर तरफ गंदगी है। कूड़ा भी हफ्तों तक नहीं उठाया जाता है। वार्ड के बाहर गैलरी में भी लोग पड़े रहते हैं। वहीं पर डस्टबिन और उसके बाहर हफ्तों पुरानी पट्टियों को नहीं उठाया जाता है। लोग सिर्फ इस इंतजार में रहते हैं कि कब बेड खाली हो और उसे भी अस्पताल में इलाज मिल पाए। उधर, कई जगह से इमरजेंसी के बाहर गैलरी की छत टपक रही है।