कोरोना के साथ दूसरी बीमारी
- साहिबाबाद के राजेंद्र सिंह (48) 17 जून की सुबह भर्ती हुए थे। वह लंबे समय से मधुमेह के रोगी थे। इनके फेफड़ों में गंभीर निमोनिया था। 19 जून को उपचार के दौरान मौत हो गई।
- गाजियाबाद की संजय कॉलोनी निवासी बच्चा फरमान तीसरी मंजिल से नीचे कूद गया था। सिर में गंभीर चोट लगी थी। गंभीर हालत में मेडिकल लाया गया। अस्पताल में ब्रेन इंजरी के कारण दौरा भी पड़ा। रिपोर्ट में कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हुई।
- शामली निवासी जुलेखा ( 65) 18 जून को मेडिकल में भर्ती हुईं। हालत गंभीर थी। 19 जून को इनकी मौत हो गई। महिला को क्रॉनिक पल्मोनरी डिजीज थी। इनको निमोनिया और एक्यूट रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम था।
- हापुड़ निवासी सुलेमान (53) को 16 जून को मेडिकल में भर्ती किया। मरीज कोरोना पॉजिटिव था। वह गंभीर निमोनिया के साथ क्रॉनिक लिवर डिजीज से पीड़ित था। पेट में पानी भरा हुआ था। काफी प्रयास के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका।
85 फीसदी से ज्यादा मरीज ठीक हुए
मेडिकल के कोविड अस्पताल के नोडल अधिकारी डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य का कहना है कि मेरठ में 27 मार्च को कोरोना का पहला मरीज मिला था। वह महाराष्ट्र से लौटा था। उसका परिवार और रिश्तेदार भी संक्रमित मिले थे। मरीज गंभीर स्थिति में होने के बाद स्वस्थ हुआ। एक साल के बच्चे से लेकर 83 साल के वृद्ध भी कोरोना को मात दे चुके हैं। गर्भवती महिलाएं भी ठीक होकर गई हैं।
मेडिकल में कोरोना से 115 मरीजों की मौत हुईं हैं। 85 प्रतिशत मरीज ऐसे रहे, जिन्हें कोरोना के साथ दूसरी गंभीर बीमारियां भी थीं। मरने वालों में मेरठ से ज्यादा आसपास के जिलों के मरीज हैं। -डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य, नोडल अधिकारी