रिश्वत लेने के मामले में डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक कुमार की गिरफ्तारी को लेकर सीएमओ ऑफिस में नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। ऑफिस स्टाफ के अनुसार पहले लगा कि डिप्टी सीएमओ का किसी से झगड़ा हो गया है। हमने जब वहां आए लोगों से पूछा तो उन्होंने खुद को विजिलेंस अधिकारी बताया। जिसके बाद वहां खलबली मच गई।ऑफिस स्टाफ के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 11 बजे सीएचसी मवाना पर तैनात दंत चिकित्सक डॉ. नीरज तोमर सीएमओ कार्यालय के कमरा नंबर तीन में डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक कुमार के केबिन में गए। उनके साथ दो और व्यक्ति थे, जो बाहर वाले रूम में खड़े होकर फाइल देखने लगे। अचानक दोनों व्यक्ति भी केबिन में गए और डिप्टी सीएमओ को कॉलर पकड़कर खींचते हुए बाहर की ओर ले जाने लगे। वहां मौजूद स्टाफ ने उन्हें ऐसा करते देख इसका कारण पूछा कि वे कौन हैं और ऐसा क्यों कर रहे हैं। लेकिन वे डिप्टी सीएमओ को कार्यालय के बाहर ले गए, जहां पर उन्हीं के साथ आए चार-पांच व्यक्ति और खड़े हुए थे। उन्होंने सीएमओ कार्यालय के स्टाफ को बताया कि वे विजिलेंस से हैं। उन्होंने रिश्वत लेते इन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार किया है, इसलिए सिविल लाइन थाने ले जा रहे हैं। इसके बाद स्टाफ ने अन्य कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी। करीब डेढ़ बजे विजिलेंस अधिकारी फिर सीएमओ कार्यालय पहुंचे और सीएमओ से इस संबंध में बातचीत की।
यह दुर्भाग्यपूर्ण: सीएमओ
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजकुमार ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता डॉ. नीरज तोमर सीएचसी मवाना पर तैनात हैं। आरोप है कि वह रक्षापुरम में डेंटल क्लीनिक में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं और अनाधिकृत रूप से अकादमी चलाते हैं। इसकी जांच डिप्टी सीएमओ डॉ. अशोक कुमार कर रहे थे। अब किसी अन्य चिकित्सा अधिकारी को यह जांच सौंपी जाएगी। पूरे मामले से आला अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। फिलहाल उनकी जिम्मेदारी डॉ. एसएस चौधरी को दी गई है।
काफी दिनों से चल रही थी दोनों में बातचीत
सीएमओ कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि डॉ. नीरज और डॉ. अशोक कुमार के बीच काफी दिनों से बातचीत चल रही थी। वे कई बार उनसे मिलने आए थे। लेकिन चिकित्सक होने के कारण कार्यालय स्टाफ को यह जानकारी नहीं थी कि इस तरह की कोई बात चल रही है।