प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में विराजमान श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा के सम्मुख चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के 35वें दिन 130 परिवारों ने विधान की मांगलिक क्रियाएं की। कार्यक्रम की शुरूआत सर्वप्रथम मुख्य वेदी के अभिषेक से हुई जिसमें सभी भक्तों ने श्री जिनेंद्र भगवान का मंत्रोचार पूर्वक जलाभिषेक किया। सभी दर्शनार्थी त्रिमूर्ति जिनालय में पहुंचे। शांतिधारा करने का सौभाग्य जितेंद्र जैन, अनुज जैन, मनीषा जैन, वर्षा जैन, दिवित जैन को प्राप्त हुआ। विधान बाल ब्र. सुनीता दीदी ने शांतिधारा के महामंत्रों का वाचन कर शांतिधारा कराई।
मुनि श्री 108 भाव भूषण महाराज ने कहा कि मनुष्य का शांतिपूर्ण जीवन स्वर्ग के समान होता है। मन की शांति सबसे बड़ी संपदा और अशांति सबसे बड़ी दरिद्रता है। मनुष्य के जीवन में शांति है तो उसका जीवन स्वर्ग समान है। जीवन में अगर शांति है, तो अभाव में भी आनंद होता है। दुनिया में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होगा, जिसे शांति नहीं चाहिए। लोग मन की शांति के लिए ही मंदिर, तीर्थ, गंगा स्नान, दान, पूजा-पाठ आदि करते हैं। जिसमें वह कहीं ना कहीं मां की शांति का प्रयास करते हैं। इस विधान में रवि जैन, अनुज सिंघल, राहुल, मेहुल, सक्षम, दीपांशू जैन, विपिन जैन, प्रक्षाल जैन, सतीश जैन, अखिल जैन आदि परिवारों के द्वारा विधान की मांगलिक क्रियाएं कराई गई।
क्षेत्र के अध्यक्ष जिवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, उपाध्यक्ष सतेंद्र कुमार जैन, अभय जैन, शशांक जैन, विजय कुमार जैन आदि मौजूद रहे। संवावद