मेरठी बहू सीमा पूनिया बिना पति-कोच के ही रियो ओलंपिक में हिस्सा लेंगी। फेडरेशन ने पति अंकुश को रियो जाने की अनुमति नहीं दी है। यह पहली बार है जब बिना कोच के सीमा खेलों में हिस्सा ले रही हैं। इससे पहले इंचियोन में हुए एशियन गेम्स में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। डिस्कस थ्रो की खिलाड़ी सीमा ने ओलंपिक में भी पदक जीतने का भरोसा जताया है।
सीमा दो साल पहले इंचियोन में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं। ओलंपिक के लिए उन्होंने चार माह अमेरिका और एक माह रूस में पति अंकुश के साथ जमकर अभ्यास किया है। सीमा ने अपनी फिटनेस पर पूरा फोकस किया। उन्होंने विदेश कोच से भी खेल की बारीकियां सीखीं हैं। बुधवार को सीमा भारतीय टीम के साथ रियो रवाना हो गईं। सीमा पूनिया के साथ उनके पति-कोच अंकुश पूनिया को भी जाना था, लेकिन एथलेटिक्स फेडरेशन से अनुमति न मिलने के कारण वह नहीं जा सके।
कड़ी की है मेहनत
इस बार अंकुश पूनिया और सीमा का लक्ष्य देश के लिए सोना जीतना है। इसी को लेकर दोनों तैयारी में भी जुटे थे। लेकिन पति-पत्नी को उस समय झटका लगा, जब अंकुश को खेल गांव जाने की अनुमति नहीं मिली।
अंकुश बढ़ाते हैं मनोबल
सीमा पूनिया ने बताया कि अगर अंकुश साथ होते तो अच्छा होता। क्योंकि वह हर पल मेरा मनोबल बढ़ाते हैं। उनके रहने से काफी सपोर्ट मिलता है। उन्होंने कहा कि मैं मायूस तो हूं, लेकिन हताश नहीं हूं। अब देश के प्रति मेरी जिम्मेदारी और बढ़ गई है। पूरे विश्वास के साथ खेलों में हिस्सा लूंगी।
डूबते कॅरियर को पति ने बचाया
2010 कॉमनवेल्थ गेम्स में सीमा ने ब्रांज मेडल जीता था। लेकिन उसके बाद उन्हें लगा कि अब मैं खेल नहीं पाऊंगी। बकौल सीमा, पति ने मेरा साथ दिया। मेरा आत्म विश्वास बढ़ाया। उसी का नतीजा है कि मैंने इंचियोन में स्वर्ण पदक जीता। ओलंपिक के लिए उन्होंने खास तैयारी कराई है।
ससुराल वालों को है बहू पर भरोसा
सीमा पूनिया के ससुर सकौती के गांव टांडा निवासी तेजपाल सिंह व सास राजकुमारी, जेठानी आस्था और जेठ अनुज पूनिया को बहू पर पूरा भरोसा है। उन्होंने बताया कि इस बार सीमा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जरूर जीतेगी। इसके लिए वह ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।